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India Daily

रांची का लाल बना नई मिसाल! 10 घंटे तैरकर पार कर दी दो देशों की दूरी; साल साल की उम्र में बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

रांची के 7 साल के ईशांक ने 29 किलोमीटर समुद्र तैरकर पार किया और दुनिया के सबसे कम उम्र के तैराक का रिकॉर्ड बना लिया है. उनकी मेहनत और हिम्मत ने पूरे देश को गर्व महसूस कराया.

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Edited By: Babli Rautela
रांची का लाल बना नई मिसाल! 10 घंटे तैरकर पार कर दी दो देशों की दूरी; साल साल की उम्र में बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
Courtesy: X

कभी कभी उम्र सिर्फ एक नंबर बनकर रह जाती है, जब इरादे उससे बड़े हो जाते हैं. झारखंड के रांची का एक छोटा सा बच्चा आज पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है. इशांक ने वह कर दिखाया है, जिसे बड़े बड़े खिलाड़ी भी चुनौती मानते हैं. महज 7 साल की उम्र में उन्होंने समुद्र की खतरनाक लहरों को चीरते हुए ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है.

इशांक ने श्रीलंका के तलाईमन्नार से भारत के धनुषकोडी तक फैले पाक स्ट्रेट को तैरकर पार किया. यह दूरी करीब 29 किलोमीटर की थी. सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने इस मुश्किल सफर को सिर्फ 9 घंटे 50 मिनट में पूरा कर लिया. इसके साथ ही वे इस समुद्री रास्ते को पार करने वाले दुनिया के सबसे कम उम्र के तैराक बन गए हैं.

वर्ल्ड रिकॉर्ड से मिली पहचान

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद इशांक को Universal Records Forum की तरफ से यंगेस्ट एंड फास्टेस्ट पाक स्ट्रेट स्विमर का खिताब दिया गया. 30 अप्रैल को शुरू हुई यह तैराकी सिर्फ एक सफर नहीं थी, बल्कि यह एक सपना था जो मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर सच हुआ.

कहा जाता है की इतनी बड़ी उपलब्धि अचानक नहीं मिलती. इशांक इसके लिए रोजाना रांची के धुर्वा डैम में 4 से 5 घंटे तक अभ्यास करते थे. उनके कोच अमन कुमार जायसवाल और बजरंग कुमार ने उन्हें लगातार ट्रेनिंग दी. कठिन परिस्थितियों में तैरने की तैयारी ने ही उन्हें समुद्र की लहरों से लड़ने की ताकत दी.

खतरनाक समुद्री सफर भी नहीं तोड़ पाया जज्बा

पाक स्ट्रेट को पार करना आसान नहीं होता. यहां तेज लहरें, समुद्री जीव और बदलता मौसम हर पल चुनौती बनकर सामने आते हैं. लेकिन इशांक ने अपने आत्मविश्वास और हिम्मत के दम पर इन सभी मुश्किलों को पार कर दिखाया है. उनकी यह उपलब्धि सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि साहस की मिसाल बन गई है.

बताते चलें की इशांक रांची के श्यामाली डीएवी स्कूल में तीसरी कक्षा के छात्र हैं. उनकी इस उपलब्धि पर स्कूल में खुशी का माहौल है. प्रिंसिपल ने कहा कि इतनी कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल करना पूरे स्कूल और देश के लिए गर्व की बात है.