चंडीगढ़: रोहतक की सुनारिया जेल में बंद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम एक बार फिर पैरोल पर जेल से बाहर आ गया है. यौन उत्पीड़न और हत्या के मामलों में सजा काट रहा राम रहीम सोमवार सुबह करीब 11 बजे जेल से सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय के लिए रवाना हुआ. उसे इस बार 40 दिनों की पैरोल दी गई है. राम रहीम को लेने के लिए सिरसा डेरे से लग्जरी गाड़ियों का काफिला जेल पहुंचा था.
गुरमीत राम रहीम को सोमवार को 40 दिनों की पैरोल पर रिहा किया गया. जेल से बाहर निकलते समय सुरक्षा के कड़े इंतजाम दिखे. सिरसा डेरे से पहुंचे काफिले में दो बुलेट प्रूफ लैंड क्रूजर और दो फॉर्च्यूनर समेत कई लग्जरी वाहन शामिल थे. काफिला सीधे राम रहीम को लेकर सिरसा के लिए रवाना हुआ. जेल प्रशासन की ओर से पैरोल की अवधि और शर्तों को लेकर औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई.
राम रहीम की रिहाई पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की प्रतिक्रिया भी सामने आई. पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल पर सीएम सैनी ने कहा कि यह कोर्ट और कानून से जुड़ा मामला है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें इस पैरोल के बारे में कोई जानकारी नहीं है. मुख्यमंत्री के इस बयान को सरकार की ओर से औपचारिक दूरी बनाए रखने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
पैरोल और फरलो को लेकर अक्सर भ्रम रहता है. पैरोल आमतौर पर राज्य सरकार या जेल प्रशासन द्वारा विशेष परिस्थितियों में दी जाती है, जैसे परिवार में मृत्यु, बीमारी या विवाह. पैरोल में कैदी या तो स्वतंत्र रहता है या पुलिस निगरानी में. वहीं फरलो किसी विशेष कारण के बिना दी जाती है और इसका उद्देश्य सजा के दौरान कैदी को मानसिक राहत देना होता है. दोनों के नियम राज्यों के अनुसार अलग अलग होते हैं.
गुरमीत राम रहीम 25 अगस्त 2017 से जेल में बंद है. उसे दो साध्वियों के यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा सुनाई गई थी. इसके बाद जनवरी 2019 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में उम्रकैद हुई. अक्टूबर 2021 में डेरा मैनेजर रणजीत सिंह की हत्या के मामले में भी उम्रकैद दी गई थी. हालांकि बाद में इस केस में हाईकोर्ट से राहत मिली, लेकिन अन्य सजाएं बरकरार हैं.
राम रहीम अब तक 15 बार जेल से बाहर आ चुका है. पहली बार अक्टूबर 2020 में एक दिन की पैरोल मिली थी. इसके बाद 2021 से 2025 के बीच अलग अलग अवधि की पैरोल और अस्थायी रिहाइयों पर वह बाहर आता रहा. जेल नियमों के अनुसार अच्छे व्यवहार वाले कैदियों को एक साल में अधिकतम 90 दिनों तक की पैरोल दी जा सकती है. हर बार उसकी रिहाई राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बनती रही है.
दरअसल, फरवरी 2022 में हरियाणा सरकार द्वारा पैरोल कानून में संशोधन के बाद से राम रहीम सिंह 400 दिनों से अधिक समय जेल से बाहर रह चुके हैं, जिसमें मौजूदा 40 दिनों की रिहाई भी शामिल है.
हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स (अस्थायी रिहाई) अधिनियम, 1988 के तहत पहले पैरोल केवल परिवार में मृत्यु, गंभीर बीमारी, विवाह या कृषि जरूरत जैसी विशेष परिस्थितियों में ही दी जाती थी. आलोचकों का आरोप है कि 2022 में किए गए संशोधन डेरा प्रमुख को लाभ पहुंचाने के लिए लाए गए, जो पहले इन शर्तों के तहत पात्र नहीं थे.
संशोधित कानून के अनुसार, एक वर्ष की सजा पूरी कर चुके दोषी हर साल 10 सप्ताह की पैरोल (दो किश्तों में) और 21 दिन की फर्लो के पात्र हैं. यह अवधि सजा में जोड़ी जाती है. सरकार का कहना है कि संशोधन का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल बनाना था और रिहाई अच्छे आचरण तथा प्रशासनिक स्वीकृति के आधार पर दी जाती है.