हरियाणा में इंदौर जैसी 'जल त्रासदी', पलवल में दूषित पानी पीने से 12 लोगों की मौत; सैड़कों बीमार
हरियाणा के पलवल में दूषित पानी के कारण 12 लोगों की मौत ने हड़कंप मचा दिया है. स्वास्थ्य विभाग की टीमें छांयसा गांव में घर-घर जाकर जांच और स्क्रीनिंग कर रही हैं.
पलवल: मध्य प्रदेश के इंदौर में प्रदूषित जल से हुई मौतों के बाद अब हरियाणा के पलवल में भी स्थिति गंभीर हो गई है. हथीन उपमंडल के छांयसा गांव में पिछले दो हफ्तों में कम से कम 12 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें पांच मासूम बच्चे भी शामिल हैं. इन मौतों का मुख्य कारण हेपेटाइटिस-बी और दूषित पेयजल बताया जा रहा है. ग्रामीणों में डर का माहौल है, जबकि स्वास्थ्य विभाग राहत और बचाव कार्यों में जुट गया है.
छांयसा गांव की करीब 5700 की आबादी इस समय गहरे सदमे में है. रिपोर्ट के अनुसार, 27 जनवरी से 11 फरवरी के बीच सात लोगों की मृत्यु हुई थी, जिनमें से चार की जान लिवर फेल होने से गई. मरने वालों में 9 साल के बच्चे से लेकर 65 साल के बुजुर्ग तक शामिल हैं. ग्रामीणों का दावा है कि स्थिति और भी भयावह है और मृतकों की संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है क्योंकि कई युवाओं की भी जान गई है.
हेपेटाइटिस और संक्रमण का गहरा खतरा
अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मृतकों में से चार लोग हेपेटाइटिस-बी वायरस (HBV) से संक्रमित पाए गए थे. यह यकृत का एक गंभीर संक्रमण है जो जीवन के लिए खतरा बन सकता है. स्वास्थ्य विभाग ने फिलहाल खाद्य विषाक्तता और प्रदूषित पानी की संभावना से इनकार नहीं किया है. गांव में अब तक 210 लोगों की जांच में दो नए हेपेटाइटिस-बी और नौ हेपेटाइटिस-सी के संदिग्ध मरीज मिले हैं, जिन्हें इलाज के लिए तत्काल अस्पताल में भर्ती किया गया है.
स्वास्थ्य विभाग का सघन जांच अभियान
पलवल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी सतिंदर वशिष्ठ के नेतृत्व में एक विशेष मेडिकल टीम गांव में तैनात की गई है. अब तक लगभग 1500 लोगों की गहन जांच की जा चुकी है और 800 से अधिक लोगों को ओपीडी में देखा गया है. स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग कर रहे हैं और जांच के लिए निरंतर रक्त के नमूने एकत्र कर रहे हैं. बीमारों ने मुख्य रूप से बुखार, पेट में दर्द, दस्त और सिरदर्द जैसी गंभीर शिकायतें की हैं.
दूषित पानी और प्रशासन की विफलता
इंदौर में प्रदूषित पानी से हुई 16 मौतों के बाद देशभर में जल आपूर्ति की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं. पलवल की इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया है. दूषित पेयजल की आपूर्ति गांव के लिए काल बन गई है. अधिकारियों ने विधिक नियमों के तहत नमूनों की जांच के आदेश दिए हैं ताकि संक्रमण के सटीक स्रोत का पता लगाया जा सके. जल शुद्धिकरण के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाने का भारी दबाव बना हुआ है.
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