Y Puran Kumar Post-Mortem: वाई. पूरन कुमार का परिवार आखिर क्यों नहीं दे रहा पोस्टमार्टम की अनुमति? सुसाइड केस में नई गुत्थी!
Y Puran Kumar Post-Mortem: हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की कथित आत्महत्या के चार दिन बाद भी उनके शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका है. परिवार ने अब तक शव परीक्षण के लिए अनुमति नहीं दी है, जबकि पुलिस ने जांच के लिए छह सदस्यीय एसआईटी गठित की है.
Y Puran Kumar Post-Mortem: हरियाणा के दिवंगत आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की मौत के मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, अधिकारी के परिवार ने अभी तक पोस्टमार्टम के लिए सहमति नहीं दी है. यह घटना 7 अक्टूबर को सामने आई थी, जब चंडीगढ़ स्थित उनके सरकारी आवास पर अधिकारी का शव बरामद किया गया था. पुलिस का कहना है कि यह मामला कथित आत्महत्या का प्रतीत होता है, लेकिन कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं.
डीजीपी और आईजी ने परिवार से की मुलाकात
सूत्रों ने बताया कि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सागर प्रीत हुड्डा और महानिरीक्षक (आईजी) पुष्पेंद्र कुमार दिवंगत अधिकारी के परिवार से मिलने पहुँचे. पुलिस सूत्रों ने कहा, 'परिवार की अनुमति मिलने के बाद, पोस्टमार्टम से पहले आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार का शव उन्हें दिखाया जाएगा. डॉक्टरों का एक पैनल गठित किया जाएगा और वही पोस्टमार्टम करेगा.'
अभी तक परिवार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि परिवार भावनात्मक रूप से बेहद विचलित है और अंतिम संस्कार व जांच की प्रक्रिया को लेकर गहन चर्चा में है.
SIT करेगी निष्पक्ष जांच
आईपीएस अधिकारी की मौत के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच के लिए छह सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है. यह टीम आईजी पुष्पेंद्र कुमार की देखरेख में काम करेगी और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 और 3(5) तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(R) के तहत दर्ज प्राथमिकी की जांच करेगी. बयान के अनुसार, 'टीम को साक्ष्य एकत्र करने, गवाहों से पूछताछ करने और आवश्यकतानुसार विशेषज्ञों की सहायता लेने की अनुमति दी गई है, ताकि जांच में पारदर्शिता बनी रहे.'
इस दुखद घटना पर कांग्रेस नेता हरीश रावत ने चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि भारतीय नौकरशाही में संकीर्ण सोच और असहिष्णुता बढ़ती जा रही है.
रावत ने एएनआई से बातचीत में कहा, 'यह देखना बेहद चिंताजनक है कि आज नौकरशाही में कितनी संकीर्णता घुस गई है. सत्ता में बैठे लोग धर्म, जाति और भाषा के नाम पर विभाजन पैदा कर रहे हैं. हमने एक सक्षम पुलिस अधिकारी खो दिया जो इस माहौल का शिकार हो गया.'