अब दाखिले के लिए पहचान पत्र और आधार कार्ड की नहीं पड़ेगी जरुरत, फरीदाबाद के सरकारी स्कूलों के लिए नया आदेश जारी
फरीदाबाद जिले के सरकारी स्कूलों में अब दाखिले के लिए आधार कार्ड या परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) की जरूरत नहीं रहेगी. जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने इस संबंध में साफ आदेश जारी कर दिया है. अब किसी भी बच्चे को दस्तावेजों की कमी के कारण स्कूल प्रवेश से नहीं रोका जाएगा.
हरियाणा: फरीदाबाद जिले के सरकारी स्कूलों में अब दाखिले के लिए आधार कार्ड या परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) की जरूरत नहीं रहेगी. जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने इस संबंध में साफ आदेश जारी कर दिया है. अब किसी भी बच्चे को दस्तावेजों की कमी के कारण स्कूल प्रवेश से नहीं रोका जाएगा. यह फैसला फरीदाबाद जैसे बड़े औद्योगिक शहर के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा. यहां पर बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर और दिहाड़ी काम करने वाले परिवार रहते हैं.
अब दाखिले के लिए पहचान पत्र और आधार कार्ड की नहीं पड़ेगी जरुरत
इन परिवारों के बच्चों के पास अक्सर हरियाणा का परिवार पहचान पत्र या आधार कार्ड नहीं होता. पहले इन बच्चों को दाखिला लेने में काफी परेशानी होती थी. अब उन्हें आसानी से स्कूल भेजा जा सकेगा. जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी बसंत कुमार ढिल्लन ने बताया कि फरीदाबाद में मजदूर वर्ग के लोग ज्यादा संख्या में रहते हैं. उनके बच्चों को शिक्षा से वंचित नहीं रहने देना है.
इस फैसले का मुख्य मकसद है कि कोई भी बच्चा स्कूल छोड़कर बाहर न रहे. ड्रॉप आउट की संख्या को शून्य करना है. आदेश के अनुसार अगर बच्चे के पास कोई पहचान पत्र या जरूरी दस्तावेज नहीं हैं, तो भी स्कूल उसे अस्थायी दाखिला दे देगा. स्कूल के स्टाफ अपनी एमआईएस आईडी से बच्चे के लिए अस्थायी प्रवेश आईडी बना लेंगे. बाद में जब परिवार पहचान पत्र या अन्य दस्तावेज बन जाएंगे, तब दाखिले को स्थायी कर दिया जाएगा.
शिक्षा विभाग ने इस आदेश में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) का हवाला दिया है. कानून के मुताबिक 6 से 14 साल तक के हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार है. किसी भी बच्चे को सिर्फ दस्तावेज न होने के कारण स्कूल से बाहर नहीं रखा जा सकता. जन्म प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र या कोई भी अन्य कागज दाखिला न देने का बहाना नहीं बन सकता.
स्कूलों के अध्यापकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे हर बच्चे का दाखिला सुनिश्चित करें. खासकर आसपास के इलाके के बच्चों को प्राथमिकता दी जाए. अगर बच्चा पास के इलाके का है, तो उसे तुरंत प्रवेश मिलना चाहिए. यह कदम बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने और गरीब परिवारों को राहत देने के लिए उठाया गया है. अब प्रवासी मजदूर भी बिना किसी चिंता के अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में भेज सकेंगे.
शिक्षा विभाग का मानना है कि दस्तावेजों की कमी शिक्षा का अधिकार छीन नहीं सकती. यह निर्णय फरीदाबाद के सरकारी स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया को और सरल बनाएगा. इससे ज्यादा से ज्यादा बच्चे स्कूल पहुंचेंगे और पढ़ाई जारी रख सकेंगे.