हार्ट अटैक आने पर सबसे पहले क्या करें, युवाओं में क्यों बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले? कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आशीष ने बताया
पहले हार्ट अटैक के मामले आमतौर पर 60 वर्ष की उम्र के बाद देखने को मिलते थे, लेकिन अब 30-35 वर्ष के युवाओं में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है.
BIG FM की ओर नई दिल्ली स्थित महिपालपुर के होटल रेडिसन ब्लू प्लाजा में हुए 'Big Healing Hands 2.0 Conclave & Awards' में हमने कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आशीष ने युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामलों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने खराब लाइफस्टाइल, तनाव, जंग फूड का सेवन, अंधाधुध और अनियमित खानपान को इसका प्रमुख कारण बताया. इसके साथ-साथ उन्होंने हार्ट अटैक के कारण और उससे बचाव को लेकर विस्तार से जानकारी दी....
प्रश्न: युवाओं में हार्ट अटैक के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
उत्तर: कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आशीष के अनुसार पहले हार्ट अटैक के मामले आमतौर पर 60 वर्ष की उम्र के बाद देखने को मिलते थे, लेकिन अब 30-35 वर्ष के युवाओं में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह क्रॉनिक स्ट्रेस, पर्याप्त नींद न लेना, धूम्रपान, व्यायाम की कमी, ओवरईटिंग, अस्वस्थ खानपान, फास्ट फूड और अनियमित भोजन की आदतें हैं. उनका कहना है कि भारतीयों में आनुवंशिक रूप से भी हृदय रोग का खतरा पश्चिमी देशों की तुलना में करीब 10 साल पहले हो सकता है. अगर कोई व्यक्ति कम उम्र से धूम्रपान कर रहा है, तो उसका जोखिम और बढ़ जाता है.
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प्रश्न: अगर हमारी लाइफस्टाइल अच्छी है, स्मोकिंग नहीं करते और जंक फूड भी नहीं खाते, तो क्या हार्ट अटैक का खतरा फिर भी हो सकता है?
उत्तर: डॉक्टर का कहना है कि केवल अच्छी लाइफस्टाइल होने से हार्ट अटैक का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता. यदि किसी व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल या परिवार में हृदय रोग का इतिहास है, तो उसका जोखिम बना रहता है. इसलिए समय-समय पर ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराते रहना जरूरी है.
प्रश्न: पहला हार्ट अटैक आने के बाद क्या दूसरा हार्ट अटैक तय है?
उत्तर: डॉ. आशीष बताते हैं कि एक बार हार्ट अटैक आने के बाद दोबारा हार्ट अटैक का खतरा सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक होता है. हालांकि आधुनिक दवाओं और बेहतर जीवनशैली की मदद से इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है. मरीज को नियमित दवा लेनी चाहिए, धूम्रपान छोड़ देना चाहिए, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखना चाहिए तथा डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए.
प्रश्न: क्या हार्ट अटैक आने के बाद सामान्य जीवन जिया जा सकता है?
उत्तर: डॉक्टर का कहना है कि हार्ट अटैक आने का मतलब जीवन समाप्त होना नहीं है. आज बेहतर दवाओं और इलाज की बदौलत मरीज लंबे समय तक सामान्य जीवन जी सकते हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मरीज हताश न हो, समय पर दवा ले और बिना डॉक्टर की सलाह के दवा कभी बंद न करे.
प्रश्न: क्या हार्ट अटैक के मरीज को जीवनभर दवा लेनी पड़ती है?
उत्तर: डॉ. आशीष के अनुसार समय के साथ दवाओं की मात्रा कम की जा सकती है, लेकिन अधिकांश मामलों में दवा पूरी तरह बंद नहीं की जाती. दवा कब और कितनी लेनी है, इसका फैसला केवल डॉक्टर ही करते हैं.
प्रश्न: क्या लो ब्लड प्रेशर वालों को हार्ट अटैक नहीं आता?
उत्तर: डॉक्टर कहते हैं कि ऐसी कोई वैज्ञानिक स्टडी नहीं है जो यह साबित करती हो कि लो ब्लड प्रेशर वाले लोगों को हार्ट अटैक नहीं हो सकता. हालांकि लो बीपी हृदय के लिए अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है, लेकिन यदि डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल या अन्य जोखिम मौजूद हैं, तो हार्ट अटैक का खतरा बना रहता है.
प्रश्न: ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कैसे नियंत्रित रखा जाए?
उत्तर: डॉ. आशीष सलाह देते हैं कि समय पर सोएं, संतुलित भोजन करें, जंक फूड और नमक का सेवन कम करें. रोजाना 30-40 मिनट ब्रिस्क वॉकिंग और नियमित कार्डियो एक्सरसाइज करें. यदि इसके बावजूद बीपी या कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित नहीं होता, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लेना जरूरी है.
प्रश्न: गर्मियों की तुलना में सर्दियों में हार्ट अटैक के मामले ज्यादा क्यों बढ़ जाते हैं?
उत्तर: डॉक्टर के मुताबिक सर्दियों में ब्लड प्रेशर बढ़ने की संभावना अधिक रहती है. इसी कारण हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के मामले बढ़ जाते हैं. जिन लोगों को पहले से हृदय रोग या हाई बीपी है, उन्हें सर्दियां शुरू होने से पहले डॉक्टर से जांच करानी चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर दवाओं की खुराक समायोजित की जा सके.
प्रश्न: हार्ट अटैक आने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?
उत्तर: डॉ. आशीष के अनुसार, अपने घर में दो दवाएं जरूर होनी चाहिए. इकॉस्प्रिन जिसे डिस्प्रिन और अटोर्वास्टाटिन. हार्ट अटैक आने पर सबसे पहले बिना देरी किए 325 मिलीग्राम एस्पिरिन (जैसे इकोस्प्रिन/डिस्प्रिन) और 80 मिली ग्राम की अटोर्वास्टाटिन तुरंत चबाकर खा लें. इसके अलावा Sorbitrate एक दवाई है जो हार्ट अटैक या हार्ट में असहनीय दर्द के दौरान ली जाती है लेकिन इसकी एक दिक्कत ये है कि अगर आपका ब्लड प्रेशर लो हो रहा है तो यह आपका बीपी और लो कर सकती है.
उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दवा लेने के बाद सुबह तक का इंतजार बिल्कुल न करें तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं या निकटतम अस्पताल पहुंचें. हार्ट अटैक में हर मिनट की देरी हृदय की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए जितनी जल्दी इलाज शुरू होगा, मरीज के बचने की संभावना उतनी ही अधिक होगी.