Delhi Building Collapse: क्या होता है Green Corridor? दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे में हुए घायलों की कैसे बचाएगा जान
सत्य निकेतन में 4 से 5 मंजिला इमारत गिरने के बाद इमरजेंसी वाहनों की आवाजाही के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया है. ग्रीन कॉरिडोर एक अस्थायी विशेष रास्ता होता है, जिसमें ट्रैफिक पुलिस की मदद से यातायात नियंत्रित किया जाता है .
नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 5 मंजिला इमारत गिरने के बाद राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है. बताया जा रहा है कि यह इमारत हॉस्टल और पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी और यहां करीब 75 बेड की व्यवस्था थी. हादसे के बाद मलबे में फंसे लोगों तक राहत पहुंचाने और इमरजेंसी वाहनों की आवाजाही आसान बनाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया है.
मौके पर बड़ी संख्या में लोग जमा होने के कारण बचाव अभियान में किसी तरह की बाधा न आए, इसके लिए भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आरएएफ को भी बुलाया गया है. ग्रीन कॉरिडोर के जरिए एंबुलेंस और दूसरे आपातकालीन वाहनों को घटनास्थल से अस्पताल तक जल्द पहुंचाने में मदद मिलती है.
क्या होता है ग्रीन कॉरिडोर?
ग्रीन कॉरिडोर एक अस्थायी और विशेष ट्रैफिक रूट होता है, जिसे आपातकालीन स्थिति में तैयार किया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य किसी मरीज, अंग या जरूरी चिकित्सा सामग्री को एक स्थान से दूसरे स्थान तक कम से कम समय में पहुंचाना होता है. इसके लिए पुलिस और ट्रैफिक विभाग निर्धारित रास्ते पर कुछ समय के लिए यातायात को रोकते या नियंत्रित करते हैं.
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ग्रीन कॉरिडोर का इस्तेमाल खास तौर पर गंभीर मरीजों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने और अंग प्रत्यारोपण के लिए किया जाता है. जैसे किसी मरीज के लिए दिल, लीवर या अन्य अंग को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक पहुंचाना हो, तो समय बेहद महत्वपूर्ण होता है. ऐसी स्थिति में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर रास्ते को जल्द से जल्द खाली कराया जाता है.
कैसे काम करता है Green Corridor?
ग्रीन कॉरिडोर बनाने के लिए अस्पताल प्रशासन, पुलिस और ट्रैफिक पुलिस के बीच समन्वय किया जाता है. सबसे पहले मरीज या अंग को ले जाने वाले वाहन के लिए एक निर्धारित मार्ग तय किया जाता है. इसके बाद उस रास्ते पर ट्रैफिक को नियंत्रित किया जाता है, ताकि एंबुलेंस या दूसरे आपातकालीन वाहन बिना रुकावट आगे बढ़ सकें.
कई मामलों में एंबुलेंस के साथ पायलट वाहन भी चलता है, जो रास्ते को सुरक्षित और खाली रखने में मदद करता है. एंबुलेंस चालक को भी ऐसे आपातकालीन हालात में तेजी और सावधानी के साथ वाहन चलाने का अनुभव होता है.
क्यों जरूरी होता है ग्रीन कॉरिडोर?
आपातकालीन चिकित्सा में हर मिनट महत्वपूर्ण हो सकता है. ट्रैफिक में फंसने से मरीज को अस्पताल पहुंचने में देरी हो सकती है. गंभीर मरीजों और अंग प्रत्यारोपण के मामलों में यह देरी जानलेवा साबित हो सकती है. ग्रीन कॉरिडोर का उद्देश्य इसी यात्रा के समय को कम करना होता है.
सत्य निकेतन हादसे में बनाया गया ग्रीन कॉरिडोर भी इसी तरह इमरजेंसी वाहनों को तेजी से घटनास्थल तक पहुंचने और जरूरत पड़ने पर घायलों को अस्पताल ले जाने में मदद करेगा. हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है.