मुंडका फैक्ट्री हादसा, सेप्टिक टैंक में दम घुटने से 3 मजदूरों की मौत, जहरीली गैस बनी जानलेवा

दिल्ली के मुंडका स्थित एक फैक्ट्री में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से तीन मजदूरों की मौत हो गई. चलिए जानते हैं कैसी है स्थिति.

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Km Jaya

नई दिल्ली: दिल्ली के मुंडका औद्योगिक क्षेत्र में शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया. एक फैक्ट्री में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से तीन मजदूरों की मौत हो गई. शुरुआती जांच में दम घुटने को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है. घटना के बाद पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और रेस्क्यू अभियान चलाया गया. हालांकि तीनों मजदूरों को बचाया नहीं जा सका. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और फैक्ट्री मालिक की भूमिका की भी जांच की जा रही है.

जानकारी के अनुसार हादसा शुक्रवार दोपहर मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक फैक्ट्री में हुआ. सबसे पहले एक मजदूर सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए अंदर उतरा. कुछ ही देर बाद जहरीली गैस की वजह से उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गया. उसे बचाने के लिए दो अन्य मजदूर भी बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के टैंक में उतर गए. लेकिन वे भी जहरीली गैस की चपेट में आ गए और तीनों टैंक के अंदर ही फंस गए.

कैसी थी वहां की स्थिति?

घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस की टीम मौके पर पहुंची. ज्वालापुरी इलाके में भारी ट्रैफिक होने के कारण पहली दमकल गाड़ी को घटनास्थल तक पहुंचने में देरी हुई. इसके बाद दूसरी दमकल गाड़ी को दूसरे रास्ते से भेजा गया. काफी मशक्कत के बाद रेस्क्यू टीम ने तीनों मजदूरों को टैंक से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी.


मृतकों की पहचान अरुण (38), संदीप (32) और चांद (42) के रूप में हुई है. तीनों दिल्ली के सुल्तानपुरी स्थित इंद्र झील इलाके के रहने वाले थे. पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है ताकि मौत के सही कारण की पुष्टि की जा सके.

जांच के दौरान क्या चला पता?

हादसे की जानकारी जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के माध्यम से एसडीएम मुंडका को भी दी गई. मुंडका थाना पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. जांच के दौरान यह पता लगाया जा रहा है कि सेप्टिक टैंक की सफाई के समय सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं. साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि मजदूरों को जरूरी सुरक्षा उपकरण, गैस जांच की व्यवस्था और अन्य सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं या नहीं.

विशेषज्ञों का कहना है कि सेप्टिक टैंक और सीवर जैसे बंद स्थानों में जहरीली गैस का खतरा हमेशा बना रहता है. ऐसे स्थानों पर काम शुरू करने से पहले गैस की जांच, ऑक्सीजन का स्तर मापना और सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करना जरूरी होता है. पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.