सोनम वांगचुक आज ही कर देंगे अपना अनशन खत्म! इन तीन शर्तों के पूरा होने पर ही खत्म होगी हंगर स्ट्राइक
सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने के लिए तीन शर्तें रखी हैं, जिनमें नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करना, संसद में मुद्दा उठाने का आश्वासन और राजनीतिक नेताओं का अस्पताल आकर भरोसा देना शामिल है.
नई दिल्ली: सोनम वांगचुक ने 20 दिनों से अधिक समय से जारी अपने अनशन को समाप्त करने के लिए तीन शर्तें रखी हैं. दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से लिखे एक हस्तलिखित पत्र में उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों पर स्पष्ट आश्वासन दिया जाता है, तभी वह अपना अनशन समाप्त करेंगे.
उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें अस्पताल में अवैध हिरासत में रखा गया है और उनकी आवाजाही तथा संवाद की स्वतंत्रता सीमित कर दी गई है. सोनम वांगचुक की पहली शर्त है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में हुई कथित विफलताओं, विशेष रूप से हाल में सामने आए नीट प्रश्नपत्र लीक मामले की जिम्मेदारी स्वीकार करे.
क्या है दूसरी शर्त?
दूसरी शर्त के तहत उन्होंने राजनीतिक दलों के नेताओं से यह आश्वासन मांगा है कि वे संसद में प्रश्नपत्र लीक का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे.
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क्या है तीसरी शर्त?
तीसरी शर्त में वांगचुक ने कहा कि यदि उनकी स्वास्थ्य स्थिति उन्हें संसद मार्च में शामिल होने की अनुमति नहीं देती, तो प्रमुख राजनीतिक नेता स्वयं अस्पताल पहुंचकर उन्हें पहली दो मांगों पर भरोसा दिलाएं. इसके बाद ही वह अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे.
क्या है पूरा मामला?
सोनम वांगचुक लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाते रहे हैं. उन्होंने 28 जून को दिल्ली के जंतर मंतर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुए प्रदर्शन में हिस्सा लिया था और वहीं से अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया था.
18 जुलाई की सुबह, अनशन के 21वें दिन, दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई. यह कार्रवाई उस समय हुई जब डॉक्टरों ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को गंभीर बताते हुए अंगों के प्रभावित होने की आशंका जताई थी. इसी बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने भी सरकार से उनके जीवन की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा था.
सोनम वांगचुक की पत्नी ने क्या रखी है मांग?
इस बीच सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग की. हालांकि अदालत ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि सरकार उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाने के अपने अधिकार के भीतर थी.
न्यायालय ने यह भी माना कि डॉक्टर उनकी लगातार निगरानी कर रहे हैं और उनकी सहमति से दवा दी जा रही है, इसलिए फिलहाल किसी अंतरिम आदेश की आवश्यकता नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार अब इस आदेश को खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी जा सकती है.