'लोगों को बचाने के लिए मैंने दो लाख के गद्दे बिछा दिए', दिल्ली होटल अग्निकांड में बाप-बेटे ने कैसे बचाई 8 लोगों की जान

कई चश्मदीदों ने बताया कि होटल में फंसे कई लोग इसलिए अपनी जान बचा सके क्यों कि पिता-पुत्र ने होटल के सामने से गुजरने वाली सड़क पर गद्दे बिछा दिए थे.

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Sagar Bhardwaj

बुधवार को दिल्ली के मानवीय नगर स्थित एक होटल में लगी भीषण आग में 21 लोगों की जान चली गई. हालांकि इस भीषण अग्निकांड के बीच कई लोगों की जान बचाकर एक पिता-पुत्र हीरो बनकर उभरे. रियाजुद्दीन मंसूरी और उनके बेटे अरमान मंसूरी मालवीय नगर के हौजरानी स्थित होटल फ्लोरिश स्टे बी एंड बी के नजदीक गद्दे की दुकान चलाते हैं. यह वही होटल है जिसमें  बुधवार को आग ने तांडव मचाया था. होटल में आग लगते ही जैसे उन्होंने देखा कि लोग आग से बचने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं वे तुरंत होटल की तरफ भागे.

धुंए के गुबार ने पांच मंजिला इमारत को पूरी तरह से अपनी जद में ले लिया था और लोग अपनी जान बचाने के लिए बिल्डिंग से कूद रहे थे ताकि वे जिंदा बच सकें. रियाजुद्दीन मंसूरी और उनके बेटे अरमान मंसूरी ने बिना अपने नुकसान की परवाह किए अपनी दुकान खाली कर दी और पूरी सड़क पर गद्दे बिछा दिए. सड़क पर बिछे इन गद्दों के कारण होटल की खिड़कियों से कूदने वाले लोगों को आसानी हुई.

कई चश्मदीदों ने बताया कि होटल में फंसे कई लोग इसलिए अपनी जान बचा सके क्यों कि पिता-पुत्र ने होटल के सामने से गुजरने वाली सड़क पर गद्दे बिछा दिए थे. रियादुद्दीन मंसूरी ने कहा, 'जब मैंने लोगों को होटल की बिल्डिंग से कूदते हुए देखा तो मैंने अपनी दुकान के गद्दे सड़क पर बिछा दिए जिससे आठ लोगों की जान बच सकी. हमने शवों को ढंकने के लिए भी चादरें दीं. फायर ब्रिगेड समय पर पहुंची और हमने करीब 20 लोगों की जान बचाई. '

मैंने नुकसान की परवाह नहीं की

दुकान के मालिक ने कहा कि जब उन्हें लगा कि लोग होटल के अंदर फंसे हुए हैं और निकलने का कोई रास्ता नहीं है तो उन्होंने अपने नुकसान की परवाह किए बगैर सड़क पर गद्दे बिछा दिए ताकि बिल्डिंग से कूदने वाले लोगों को कम चोट लगे. आग पर काबू पाने के बाद दोनों ने शवों को ढंकने के लिए भी अपनी दुकान से चादरें निकालकर दीं.

बता दें कि फ्लोरिश स्टे बी एंड बी में बुधवार सुबह 8.30 मिनट पर आग लगी थी. चंद मिनटों में ही आग ने पूरी बिल्डिंग को निगल लिया. अधिकारियों के मुताबिक, बिल्डिंग में आन और जाने का एक ही रास्ता था. खिड़कियां भी सील थी और मेन दरवाजा सेंसर से चलता था. आग लगने के बाद सेंसर ने काम करना बंद कर दिया था जिससे दरवाजा नहीं खुला.

21 लोगों की मौत 58 का इलाज जारी

इस अग्निकांड में 21 लोगों की मौत हो गई जबकि 58 लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. घायलों में 12 विदेशी नगरिक हैं जिनका नजदीकी अस्पतालों में इलाज चल रहा है. अधिकारियों का आरोप है कि होटल बिना फायर एनओसी के बिना संचालित हो रहा था. उन्होंने यह भी कहा कि होटल को 6 कमरों की अनुमति थी लेकिन उसने 25 कमरे बना रखे थे जिसमें से कुछ बेसमेंट में थे.