दिल्ली में एयर क्वालिटी बेहद खराब श्रेणी में, केन्द्रीय पैनल ने ग्रैप 3 को किया अब और सख्त
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिल्ली में वायु प्रदूषण के बढ़ते खतरे के बीच GRAP चरण-III को और कड़ा बना दिया. आम तौर पर ‘गंभीर’ श्रेणी में लागू होने वाले प्रतिबंध अब ‘बहुत खराब’ श्रेणी के दौरान भी लागू किए जाएंगे.
नई दिल्ली: दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण का स्तर फिर से खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. हवा की क्वालिटी ‘बहुत खराब’ श्रेणी में लगातार बनी हुई है, जिससे सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है. राजधानी के विस्तृत क्षेत्रों में धुंध, धूल और उद्योगों के उत्सर्जन से हालात और बिगड़ते जा रहे हैं. वहीं वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए शनिवार को ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) को संशोधित कर उससे जुड़े प्रतिबंधों को और कड़ा कर दिया.
इन नियमों को अब पहले से अधिक प्रभावशाली तरीके से प्रदूषण कम करने के उद्देश्य के साथ लागू किया जाएगा. CAQM का कहना है कि यह योजना तभी प्रभावी होगी जब सभी हितधारक, स्थानीय निकाय, उद्योग, वाहन उपयोगकर्ता और आम जनता सामूहिक रूप से नियमों का पालन करें.
GRAP: आपातकालीन प्रतिक्रिया का ढांचा
CAQM के अनुसार GRAP पूरे एनसीआर के लिए एक आपातकालीन तंत्र की तरह काम करता है. यह प्लान दिल्ली के औसत दैनिक AQI, मौसम के पूर्वानुमान और प्रदूषण के व्यवहार का वैज्ञानिक मूल्यांकन कर सक्रिय होता है. इसके जरिए प्रदूषण बढ़ने से पहले और बाद दोनों स्थितियों में सख्त प्रबंधन सुनिश्चित किया जाता है.
वैज्ञानिक अध्ययन और विशेषज्ञों के सुझाव पर तैयार
GRAP को किसी एक संस्था ने नहीं बनाया बल्कि इसे वर्षों के डेटा, पर्यावरणीय अध्ययनों, विशेषज्ञों की राय और हितधारकों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है. इस प्लान में बदलाव भी वैज्ञानिक मूल्यांकन और प्रदूषण रुझानों की सतत निगरानी पर आधारित होता है.
20 नवंबर को अहम बैठक में हुआ फैसला
20 नवंबर 2025 को CAQM उप-समिति ने सभी संबंधित एजेंसियों के साथ व्यापक चर्चा की. इस परामर्श के दौरान वायु-गुणवत्ता में और गिरावट को तुरंत रोकने के उपायों पर विचार हुआ. बैठक में GRAP की मौजूदा अनुसूची को संशोधित करने पर सहमति बनी ताकि प्रदूषण नियंत्रण के लिए त्वरित और कड़े कदम लिए जा सकें.
प्रदूषण के बिगड़ने से पहले रोकथाम
नए बदलावों का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि वायु गुणवत्ता केवल बिगड़ने पर बंदिशें न बढ़ाई जाएं, बल्कि उसके बिगड़ने के संकेत मिलते ही सख्त कार्रवाई लागू हो जाए. इससे प्रदूषण को ‘गंभीर’ स्तर तक पहुंचने से पहले ही नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.
इसे रोकने के लिए केवल सरकारी कदम पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण में आम नागरिकों की भूमिका भी जरूरी है.
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