25 मार्च से भारत मंडपम में होगा दिल्ली का पहला इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, CM रेखा गुप्ता ने किया ऐलान; जानें डिटेल्स

दिल्ली का पहला इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 25 से 31 मार्च तक भारत मंडपम में होगा. 100 से ज्यादा देशों से 2,000 से ज्यादा फिल्में भेजी गई हैं. सरकार का मकसद दिल्ली को ग्लोबल क्रिएटिव और कल्चरल हब बनाना है.

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Km Jaya

नई दिल्ली: दिल्ली का पहला इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल यानी IFFD, 25 से 31 मार्च तक मशहूर कन्वेंशन सेंटर भारत मंडपम में हो रहा है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और टूरिज्म मिनिस्टर कपिल मिश्रा ने मिलकर इस फेस्टिवल का ऐलान किया, जिसका मकसद दिल्ली को एक ग्लोबल 'क्रिएटिव और कल्चरल हब' के तौर पर बनाना है.

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार के कार्यकाल के 365 दिन पूरे होने के मौके पर आयोजित इस फेस्टिवल के लिए 100 से ज्यादा देशों से 2,000 से ज्यादा फिल्में भेजी गई हैं. इस इवेंट के तहत पंजाबी, गुजराती, तमिल और तेलुगु समेत कई भारतीय भाषाओं की फिल्में न सिर्फ बड़े ऑडिटोरियम में बल्कि दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में भी दिखाई जाएंगी. प्रधानमंत्री के दिल्ली को क्रिएटिव कैपिटल बनाने के विजन के मुताबिक यह इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अब हर साल होगा.

सीएम रेखा गुप्ता ने क्या कहा?

सीएम रेखा गुप्ता ने दिल्ली की डाइवर्सिटी पर जोर देते हुए कहा कि यह शहर पूरे देश को दिखाता है. उनके मुताबिक दिल्ली का कोई खास कल्चर नहीं है, बल्कि यह देश के हर कोने को दिखाता है. उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से अपील की कि वे देश बनाने की भावना के साथ फिल्में बनाएं और इस बात पर जोर दिया कि सिनेमा में समाज को बदलने की ताकत है.

सीएम ने अपने कॉलेज के दिनों को याद करते हुए क्या कहा?

फिल्मों के लिए अपना पर्सनल प्यार शेयर करते हुए, सीएम ने फिल्मों के लिए अपने बहुत ज्यादा पैशन के बारे में बताया. उन्होंने मिरांडा हाउस में अपनी पढ़ाई के दौरान आमिर खान और सोनाली बेंद्रे की फिल्में देखने को याद किया. चीफ मिनिस्टर बनने के बाद से समय की कमी के बावजूद उन्होंने फेस्टिवल में तीन से चार फिल्में देखने की इच्छा जाहिर की.

पर्यटन मंत्री ने क्या कहा?

पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि फेस्टिवल का मकसद दिल्ली को सिर्फ एक आने-जाने की जगह से एक बड़ा टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाना है. यशोभूमि और भारत मंडपम जैसी वर्ल्ड-क्लास जगहें दिल्ली के कल्चरल और टूरिज्म पोटेंशियल को बढ़ाएंगी. सरकार यह पक्का करने की कोशिश कर रही है कि सिनेमा समाज और कम्युनिटी के हर हिस्से तक पहुंचे.