IPL 2026 West Bengal Assembly Election 2026

वायु प्रदूषण से दिल्ली हाईकोर्ट के वकीलों में दहशत, की ये मांग

दिल्ली में खतरनाक स्तर के प्रदूषण को देखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने हाई कोर्ट से अस्थायी रूप से वर्चुअल या हाइब्रिड सुनवाई शुरू करने की मांग की, ताकि वकीलों और अदालती कर्मचारियों का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके.

Gemini AI
Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: राजधानी में लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता को देखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने दिल्ली उच्च न्यायालय से अपील की है कि वकीलों, वादियों और अदालत के कर्मचारियों की सेहत को सुरक्षित रखने के लिए कुछ समय के लिए हाइब्रिड या वर्चुअल सुनवाई शुरू की जाए.

पाहवा ने यह आग्रह मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय को लिखे एक विस्तृत पत्र के माध्यम से किया है. उन्होंने बताया कि दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार ‘गंभीर’ श्रेणी में बना हुआ है. कई इलाकों में AQI 450 से 600 के बीच दर्ज किया जा रहा है, जो बेहद खतरनाक माना जाता है. वहीं PM2.5 का स्तर 190 mg/m³ पार कर चुका है, जबकि इसकी तय सुरक्षित सीमा 60 mg/m³ है. यह स्तर चिकित्सा की दृष्टि से ज़हरीला और जानलेवा माना जाता है.

बेहद खतरनाक है राजधानी की जहरीली हवा

पाहवा के मुताबिक, इतना गंभीर प्रदूषण केवल असुविधा नहीं बल्कि शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे फेफड़े, दिल और दिमाग को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है. उन्होंने कहा कि कानूनी बिरादरी में कई लोग पहले से ही अस्थमा, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं, जिनके लिए यह प्रदूषण और भी अधिक खतरनाक है. कई वकील लगातार खांसी, गले में जलन, सांस लेने में दिक्कत और थकान जैसी समस्याएं झेल रहे हैं.

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की हाल की टिप्पणी का उल्लेख भी किया, जिसमें उन्होंने वकीलों को स्वास्थ्य जोखिम कम करने के लिए वर्चुअल सुनवाई अपनाने की सलाह दी थी. पाहवा ने बताया कि केंद्र और दिल्ली सरकार पहले ही GRAP के स्टेज III और IV जैसे आपातकालीन नियम लागू कर चुकी हैं, जिनमें निर्माण कार्यों पर रोक, कुछ डीजल वाहनों पर प्रतिबंध, सरकारी कार्यालयों के समय में बदलाव और एंटी-स्मॉग गन की तैनाती जैसे बड़े कदम शामिल हैं.

प्रदुषण से बढ़ रही स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं

लेकिन इन सख्त उपायों के बाद भी, अदालत परिसर में रोजाना हजारों लोगों की मौजूदगी उन्हें ऐसे प्रदूषण के बीच अनावश्यक खतरे में डाल रही है. इसी वजह से उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि फिर से अस्थायी रूप से वर्चुअल या हाइब्रिड सुनवाई शुरू की जाए, जैसा कि कोविड-19 महामारी के समय सफलतापूर्वक चलाया गया था.

पाहवा का कहना है कि वर्चुअल सुनवाई दोहरे फायदे देगी, एक ओर लोगों को जहरीली हवा से राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर न्यायिक कार्य भी बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा. साथ ही, यह कदम सरकार के प्रदूषण कम करने के प्रयासों का भी समर्थन करेगा, क्योंकि इससे यातायात और वाहन उत्सर्जन पर भी असर पड़ेगा.

अंत में उन्होंने कहा कि जब तक प्रदूषण का स्तर सामान्य नहीं हो जाता, तब तक सुनवाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चलाना एक संवेदनशील और दूरदर्शी कदम होगा, जो जनता के स्वास्थ्य और न्याय, दोनों को सुरक्षित रखेगा.