दिल्ली बनेगी मेडिकल टूरिज्म हब, अस्पतालों से होटल तक बढ़ेंगे रोजगार और कारोबार
दिल्ली को मेडिकल टूरिज्म हब बनाने की पहल से स्वास्थ्य सेवाओं के साथ होटल, परिवहन, दवा उद्योग, पर्यटन और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की सरकार की पहल को स्वास्थ्य क्षेत्र के साथ-साथ अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा कदम माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा, विदेशी मरीजों की संख्या बढ़ेगी और कई क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
दिल्ली पहले से ही देश का प्रमुख चिकित्सा केंद्र है. यहां हर साल करीब 30 लाख मरीज और उनके तीमारदार दूसरे राज्यों से इलाज के लिए पहुंचते हैं. इसके अलावा दो लाख से अधिक विदेशी मरीज भी विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए दिल्ली आते हैं. बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता के कारण राजधानी देश और विदेश के मरीजों की पहली पसंद बनती जा रही है.
कौन-कौन से संस्थान उपलब्ध करा रहे सेवा?
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, सफदरजंग अस्पताल, इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज, राम मनोहर लोहिया अस्पताल, लोक नायक अस्पताल, जी. बी. पंत अस्पताल और गुरु तेग बहादुर अस्पताल जैसे बड़े सरकारी अस्पतालों के साथ अपोलो हॉस्पिटल्स, मैक्स हेल्थकेयर, फोर्टिस हेल्थकेयर और सर गंगा राम अस्पताल जैसे निजी अस्पताल कैंसर, हृदय रोग, अंग प्रत्यारोपण, न्यूरो सर्जरी, रोबोटिक सर्जरी और आईवीएफ जैसी उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं.
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विशेषज्ञों के अनुसार यदि स्वास्थ्य सेवाओं के साथ आवास, परिवहन, बहुभाषी सहायता, डिजिटल हेल्थ सेवाएं और मेडिकल टूरिज्म नेटवर्क को मजबूत किया जाता है, तो इसका सीधा लाभ दिल्ली की अर्थव्यवस्था को मिलेगा. इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का तेजी से विस्तार होगा.
क्या होगा इससे फायदा?
मेडिकल टूरिज्म बढ़ने से डॉक्टरों, नर्सों, लैब तकनीशियनों, फिजियोथेरेपिस्ट, रेडियोग्राफर और अन्य पैरामेडिकल कर्मचारियों की मांग बढ़ सकती है. साथ ही दवा उद्योग, मेडिकल उपकरण, डायग्नोस्टिक सेंटर और हेल्थ टेक सेक्टर को भी बढ़ावा मिलेगा.
इसके अलावा होटल, गेस्ट हाउस, सर्विस अपार्टमेंट, टैक्सी, एंबुलेंस, ट्रैवल एजेंसियां, रेस्तरां, स्थानीय बाजार और बीमा सेवाओं से जुड़े कारोबार को भी फायदा होने की संभावना है. आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और वेलनेस सेवाओं की मांग भी बढ़ सकती है.
सरकार की यह पहल सफल होने पर दिल्ली न केवल देश का बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक प्रमुख मेडिकल टूरिज्म और हेल्थकेयर केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर सकती है.