700 से ज्यादा लोगों से डेढ़ करोड़ की ठगी, फिर दुबई भाग गया आरोपी; सूरत एयरपोर्ट से हुआ गिरफ्तार

दिल्ली के बुराड़ी में जूलरी किटी के नाम पर सैकड़ों लोगों से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी के मामले में EOW ने 24 वर्षीय अनिकेत वर्मा को गिरफ्तार किया है.

Pinterest
Km Jaya

दिल्ली में जूलरी किटी के नाम पर सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने के मामले में आर्थिक अपराध शाखा यानी EOW ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. आरोपी की पहचान 24 वर्षीय अनिकेत वर्मा के रूप में हुई है. पुलिस के मुताबिक, अनिकेत अपने पिता नरेश कुमार वर्मा के साथ मिलकर बुराड़ी इलाके में जूलरी किटी चलाता था और लोगों को हर महीने 1,000 रुपये जमा करने के बदले 24 महीने बाद 28,000 रुपये या इतनी कीमत की जूलरी देने का भरोसा दिलाता था.

पुलिस के मुताबिक इस मामले में 700 से ज्यादा लोगों से करीब 1.5 करोड़ रुपये की ठगी का आरोप है. हालांकि, जांच के दौरान करीब 1,200 लोगों के इस योजना से जुड़ने की जानकारी सामने आई है. आरोप है कि किटी में पैसे जमा कराने के बाद लोगों को तय समय पर जूलरी या रकम देने के बजाय आरोपी फरार हो गए.

कहां का है मामला?

मामला बाबा श्याम गिरी जूलर्स, जगतपुर, बुराड़ी से जुड़ा है. पुलिस ने दुकान के मालिक नरेश कुमार वर्मा और उसके बेटे अनिकेत के खिलाफ मामला दर्ज किया था. कई पीड़ितों की शिकायत के आधार पर EOW ने 8 अक्टूबर 2025 को केस दर्ज किया था. 


जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी पिता-पुत्र ने दिल्ली में अपनी संपत्तियां बेच दी थीं और परिवार के साथ विदेश चले गए थे. बाद में दोनों के दुबई में रहने की जानकारी सामने आई. पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर यानी LOC भी जारी कराया था, ताकि विदेश से भारत आने पर उन्हें पकड़ा जा सके.

सूरत एयरपोर्ट पर पकड़ा गया अनिकेत

पुलिस को 10 सितंबर को जानकारी मिली कि अनिकेत वर्मा को सूरत एयरपोर्ट पर डिटेन किया गया है. इसके बाद EOW की टीम सूरत पहुंची. पुलिस ने 11 सितंबर को अनिकेत को गिरफ्तार कर लिया. अब जांच एजेंसी उसके पिता नरेश कुमार वर्मा की तलाश कर रही है, जो पुलिस के मुताबिक फिलहाल दुबई में रह रहे हैं. पुलिस उन्हें भारत लाने की कोशिश के साथ ही मामले में उनकी भूमिका की जांच कर रही है.

हर महीने 1,000 रुपये जमा कराने का झांसा

पुलिस की जांच के मुताबिक, जूलरी किटी में लोगों से हर महीने 1,000 रुपये जमा कराए जाते थे. उन्हें 24 महीने पूरे होने पर 28,000 रुपये या इसी कीमत की जूलरी देने का भरोसा दिया जाता था. इसी वादे के आधार पर बड़ी संख्या में लोगों से रकम जमा कराई गई.

केस दर्ज होने के बाद जब लोगों को रकम या जूलरी नहीं मिली तो शिकायतें पुलिस तक पहुंचीं. इसके बाद EOW ने मामले की जांच शुरू की और आरोपियों की तलाश के लिए LOC जारी कराया.