दिल्ली में DDA का महा-एक्शन: सरकारी जमीनों पर बने अवैध निर्माणों पर 72 घंटे में चलेगा बुलडोजर

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए नया एसओपी जारी किया है, जिसके तहत 72 घंटों के भीतर अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया जाएगा.

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Sagar Bhardwaj

देश की राजधानी दिल्ली में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करने वालों की अब खैर नहीं है. दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अनधिकृत निर्माणों को जड़ से खत्म करने के लिए एक बेहद सख्त स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू कर दिया है. उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की जीरो-टॉलरेंस नीति के तहत जारी इस नए नियम के मुताबिक, डीडीए या किसी भी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा या निर्माण पाए जाने के महज 72 घंटे के भीतर उसे पूरी तरह जमींदोज कर दिया जाएगा.

निजी जमीनों पर भी पैनी नजर

डीडीए की यह दंडात्मक कार्रवाई सिर्फ सरकारी भूखंडों तक ही सीमित नहीं रहेगी. विकास क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाली निजी संपत्तियों पर भी यदि कोई अवैध या बिना अनुमति के निर्माण कार्य चलता पाया गया, तो उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए उसे भी ढहा दिया जाएगा. इस व्यापक अभियान को सुचारू रूप से अंजाम देने के लिए प्राधिकरण ने चार क्विक रिस्पॉन्स टीमें (QRTs) गठित की हैं, जो किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मोर्चा संभालेंगी.

निगरानी के लिए 14 टीमें गठित


नियमों के उल्लंघन को शुरुआती दौर में ही पकड़ने के लिए 14 फ्लाइंग स्क्वाड टीमें लगातार विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण करेंगी. ये टीमें हाई-टेक तकनीकों जैसे ड्रोन सर्वे, जियो-टैगिंग और समय-तारीख वाली तस्वीरों के जरिए अवैध निर्माणों को चिन्हित कर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी. इस पूरी प्रक्रिया को खाली जमीन निगरानी प्रणाली (VLMS) से जोड़ा गया है. इसके अलावा, कार्रवाई के तुरंत बाद अधिकारियों को घटना की वीडियोग्राफी और 'बिफोर-आफ्टर' तस्वीरें जमा करनी होंगी.

दोबारा कब्जे पर पूरी तरह रोक

अवैध निर्माणों को गिराने के बाद भूमाफियाओं द्वारा दोबारा उस जमीन पर कब्जा करने की कोशिशों को नाकाम करने के लिए भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. मुक्त कराई गई सभी जमीनों पर तुरंत डीडीए के मालिकाना हक वाले आधिकारिक बोर्ड लगाए जाएंगे. इस अभियान में बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के लिए भूमि प्रबंधन, इंजीनियरिंग और बागवानी विभागों को स्पष्ट जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, ताकि दिल्ली को अतिक्रमण मुक्त बनाया जा सके.