BIG HEALING HANDS 2.0: रोबोटिक्स कैसे बदल रही भारत के हेल्थकेयर में इलाज की तस्वीर, डॉक्टरों ने बताया
भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र तकनीक के सहारे तेजी से बदल रहा है और रोबोटिक्स इस बदलाव का अहम हिस्सा बन चुका है. पहले जहां रोबोट का इस्तेमाल केवल चुनिंदा बड़े अस्पतालों तक सीमित था, वहीं अब देश के कई मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल रोबोटिक तकनीक को अपना रहे हैं.
BIG FM की ओर नई दिल्ली स्थित महिपालपुर के होटल रेडिसन ब्लू प्लाजा में संचालित हो रहे 'Big Healing Hands 2.0 Conclave & Awards' में मेडिकल फील्ड के दिग्गजों और डॉक्टरों ने भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र में रोबोटिक्स के इस्तेमाल और इसके फायदों को लेकर विस्तार से जानकारी दी. डॉक्टरों ने बताया कि कैसे रोबोटिक्स ऑपरेशन से लेकर मरीजों की बेहतर देखभाल तक वरदान साबित हो रहा है. डॉक्टरों ने बताया कि मेडिकल क्षेत्र में रोबोटिक्स का भविष्य बेहद उज्ज्वल है. डॉक्टरों ने बताया कि जहां हाथ से सर्जरी करने में सफलता की संभावना 95 प्रतिशत है वहीं रोबोट के इस्तेमाल में सफलता की संभावना 99 प्रतिशत तक हो जाती है.
डॉक्टर पुलक वत्स्य (कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक्स, फोर्टिस ओखला) ने बताया कि जब हम घुटनों के मरीजों की सर्जरी करते हैं तो 12 से 15% मरीज सर्जरी के बाद असंतुष्टी व्यक्त करते हैं उनका कहना होता है कि उन्हें बहुत ही अननेचुरल फील हो रहा है, यह मुझे मेरा घुटना नहीं लगता. रोबोटिक्स ने इस स्थिति को कम करने में बहुत मदद की है. उन्होंने बताया कि रोबोटिक्स 99% सटीकता के साथ यह बता देता है कि मरीज को किस तरह के इलाज की जरूरत है. रोबोटिक्स के जरिये बेहद सूक्ष्म तरीके से मरीज की स्थिति का पता चल जाता है जो इंसानी तौर पर पता कर पाना मुमकिन नहीं है. इससे मरीज ऑपरेशन के बाद जल्दी ठीक हो जाता है और उसे दर्द भी कम होता है.
उन्होंने बताया कि रोबोट से सर्जरी कराने से मरीज की यह शिकायत भी खत्म हो जाती है कि मैंने उस अस्पताल में घुटने का ऑपरेशन करवाया था और मेरा घुटना खराब हो गया क्योंकि हर अस्पताल का रोबोट समान तरीके से काम करता है.
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डॉक्टर पुलक ने बताया कि जिस तेजी से भारत में घुटनों का ट्रांसप्लांट हो रहा है उस स्थिति को देखते हुए हमें बड़े पैमाने पर रोबोटिक्स को अपनाना होगा क्योंकि इससे ऑपरेशन में तेजी लाने और उसकी सटीकता में भी मदद मिलेगी. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि रोबोटिक्स के इस्तेमाल के लिए डॉक्टर को सर्जरी आना भी बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि वह खुद पिछले 3-4 सालों से रोबोटिक्स का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसने उनके नतीजों में बहुत अधिक सुधार किया है.
हाथ से इंप्लांट करने और रोबोटिक्स से इंप्लांट करने में क्या अंतर है
जब डॉ. पुलक से पूछा गया कि जब आब 12-15 साल बाद दोबारा से मरीज के घुटनों का प्रत्यारोपण करते हो तो हाथ से और रोबोटिक से प्रत्यारोपण करने में क्या अंतर आता है? इस पर उन्होंने कहा कि चूंकि अभी रोबोटिक तकनीक नहीं है इसलिए हमें यह नहीं पता कि नी-रिप्लेसमेंट के 25 से 30 साल बाद क्या होता है लेकिन चूंकि रोबोट बेहद सूक्ष्म तरीके से और ज्यादा सटीकता के साथ घुटने बदने में सहायक है इसलिए हमें उम्मीद है कि इसके नतीजे हाथ से सर्जरी करने से ज्यादा अच्छे होंगे.