'योनि में बिना लिंग प्रवेश किए वीर्य गिराना रेप नहीं..', हाईकोर्ट ने पलटा 20 साल पुराना फैसला

वासुदेव पर एक महिला को बहला-फुसलाकर अपने घर ले जाने और उसे बंधक बनाकर उसके साथ मारपीट करने और उसका रेप करने का आरोप था.

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Sagar Bhardwaj

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 2004 के एक बलात्कार के मामले में एक व्यक्ति की सजा को पलट दिया. कोर्ट ने कहा कि शारीरिक प्रवेश के बिना वीर्यपात भारतीय कानून के तहत बलात्कार की कानूनी परिभाषा को पूरा नहीं करता है. जस्टिस कुमार व्यास ने सोमवार 16 फरवरी 2026 को फैसला सुनाते हुए कहा कि हालांकि अभियुक्त के कृत्य हिंसक यौन हमले के अंतर्गत आते हैं लेकिन प्रवेश (लिंग का योनि में प्रवेश) न होने के कारण यह अपराध बलात्कार के प्रयास की श्रेणी में आ जाता है.

प्रवेश बलात्कार की अनिवार्य शर्त

अदालत ने कहा कि बलात्कार की अनिवार्य शर्त प्रवेश है न की वीर्य का गिरना. बिना प्रवेश के वीर्य का गिरना रेप का प्रयास है वास्तव में रेप करना नहीं. कोर्ट का यह फैसला वासुदेव गोंड की अपील पर आया जिन्हें साल 2004 में धमतारी जिले में हुई एक घटना के लिए निचली अदालत ने सात साल जेल की सजा सुनाई थी.  

क्या था पूरा मामला

वासुदेव पर एक महिला को बहला-फुसलाकर अपने घर ले जाने और उसे बंधक बनाकर उसके साथ मारपीट करने का आरोप था. हाई कोर्ट के विचार-विमर्श के केंद्र में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 के तहत वैधानिक आवश्यकता थी जिसमें यह अनिवार्य है कि बलात्कार का आरोप साबित करने के लिए प्रवेश होना अनिवार्य है, भले ही चाहे वह कितना भी हल्का क्यों न हो साबित होना चाहिए.

अदालत ने कई साक्ष्यों पर दिया ध्यान

इसके लिए अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट और गवाही में विसंगतियां जैसे कई साक्ष्यों पर ध्यान दिया. चिकित्सा जांच में सामने आया था कि महिला की वर्जिनिटी बरकरार थी. डॉक्टरों ने योनि में लालिमा और कपड़ों पर मानव शुक्राणु की उपस्थिति देखी लेकिन वे संभोग की पुष्टि नहीं कर सके.

वहीं पीड़िता के बयानों में आंतरिक विसंगतियां देखीं जिरह के दौरान उसने कथित तौर पर केवल आंशिक प्रवेश की संभावना स्वीकार की जिसे अदालत ने पूर्ण अपराध के संबंध में कानूनी संदेह का विषय माना.

काफी हद तक कम कर दी सजा

अदालत ने अपराध को धारा 376 (बालत्कार) से पुनर्वर्गीकृत करके धारा 376 के साथ धारा 511 (बलात्कार का प्रयास) के तहत वर्गीकृत करने के बाद गोंड की सजा काफी हद तक कम कर दी. नए आदेश के तहत अब गोंड को तीन साल और छह महीने के कठोर कारावास के साथ 200 रुपए जुर्माने के तौर पर भरने होंगे. वहीं गोंड द्वारा हिरासत में बिताए गए 13 महीने भी उनकी अंतिम सजा में जोड़े जाएंगे.