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कैंसर और लकवे से जंग जीतकर 38 की उम्र में किया UPSC पास, छत्तीसगढ़ का बेटा संजय धरैया बना मिसाल

छत्तीसगढ़ के संजय धरैया ने कैंसर और लकवे जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ते हुए 38 साल की उम्र में UPSC 2025 में सफलता हासिल की. उनकी कहानी संघर्ष और दृढ़ निश्चय की प्रेरणादायक मिसाल है.

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Km Jaya

रायपुर: छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव के संजय धरैया जिन्होंने दर्द को अपनी ताकत में बदला और तमाम मुश्किलों के बावजूद अपने सपने को पूरा किया. छह साल तक कैंसर से जूझने, लकवे का सामना करने और चार बड़ी सर्जरी करवाने के बाद भी उन्होंने एक ही बात पर विश्वास बनाए रखा 'कभी हार मत मानो'.

संजय का जन्म महासमुंद जिले के बेल्टुकरी गांव में हुआ था, जहां उनके पिता एक किसान के तौर पर काम करते हैं. घर में सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा को हमेशा महत्व दिया गया. उन्होंने अपनी पढ़ाई एक सरकारी स्कूल से शुरू की, जहां गांव के सीधे-सादे माहौल के बीच उनके सपने धीरे-धीरे आकार लेने लगे.

कहां से की 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई?

बाद में संजय को जवाहर नवोदय विद्यालय में दाखिला मिल गया, जहां उन्होंने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की. यहीं पर उन्होंने पहली बार किसी IAS अधिकारी को देखा. उस पल ने उन्हें सिविल सेवाओं में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया. हालांकि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने पहले काम करने का फैसला किया ताकि वे अपने परिवार का सहारा बन सकें.

कैसे बनाए रखा अपना धैर्य? 

12वीं कक्षा पूरी करने के बाद संजय ने एक स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया और साथ ही अपनी पढ़ाई भी जारी रखी. समय के साथ उन्हें SBI और इंडिया पोस्ट जैसे सरकारी संस्थानों में काम करने के अवसर मिले. व्यस्त दिनचर्या के बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी के लिए रोजाना छह से सात घंटे समर्पित किए. दिन में काम करते और रात में पढ़ाई करते.

कब आया सबसे मुश्किल समय?

2012 में उनकी जिंदगी में एक मुश्किल मोड़ आया जब उन्हें कैंसर का पता चला. इलाज के दौरान उन्हें लकवा भी मार गया. 2013 और 2015 के बीच उनकी चार बड़ी सर्जरी हुईं. अस्पताल के कमरे, दवाएं और लंबे समय तक रहने वाला सन्नाटा उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए.

कब दी थी पहली बार UPSC की परीक्षा?

संजय ने पहली बार 2019 में UPSC की परीक्षा दी लेकिन उन्हें मनचाहा परिणाम नहीं मिला. हालांकि उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी. अपने सपने की विशालता को समझते हुए, उन्होंने और भी अधिक धैर्य और एकाग्रता के साथ तैयारी की. 2022 में वे रायपुर चले गए और पूरे समर्पण के साथ अपनी तैयारी फिर से शुरू की.

उनकी कड़ी मेहनत आखिरकार रंग लाई, जब उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में अखिल भारतीय रैंक 946 हासिल की. ​​38 वर्ष की आयु में संजय ने वह हासिल कर दिखाया जो कभी असंभव प्रतीत होता था और यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प सबसे कठिन चुनौतियों पर भी विजय प्राप्त कर सकता है.