छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे को मिली जमानत, 200 करोड़ मिलने का दावा
चैतन्य बघेल का नाम राज्य के कथित शराब घोटाले से जोड़ा गया था. आरोप है कि इस घोटाले में बड़े स्तर पर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया.
छत्तीसगढ़ में हुए करोड़ों रुपये के कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को बड़ी राहत मिली है. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है. यह जमानत प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज मामलों में दी गई है. अदालत के इस फैसले के बाद चैतन्य बघेल को कानूनी स्तर पर राहत मिली है.
किन मामलों में मिली जमानत
चैतन्य बघेल का नाम राज्य के कथित शराब घोटाले से जोड़ा गया था. आरोप है कि इस घोटाले में बड़े स्तर पर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया. इसी सिलसिले में ईडी और ईओडब्ल्यू ने अलग-अलग मामले दर्ज किए थे. इन मामलों में जांच के दौरान चैतन्य बघेल से पूछताछ भी की गई थी. अब हाईकोर्ट ने दोनों ही एजेंसियों के मामलों में उन्हें जमानत देने का आदेश दिया है.
बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने रखे तर्क
हाईकोर्ट में चैतन्य बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने पक्ष रखा. उनके साथ अधिवक्ता मयंक जैन, हर्षवर्धन, परगनिहा और मधुर जैन भी मौजूद रहे. बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी ने जांच में सहयोग किया है और फिलहाल हिरासत में रखने की कोई ठोस जरूरत नहीं है. अदालत ने सभी तथ्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद जमानत मंजूर की.
चैतन्य पर क्या हैं आरोप
जांच एंजेंसी का दावा है कि छत्तीसगढ शराब घोटाले में चैतन्य बघेल शराब सिंडिकेट के सबसे बड़े लेवल पर था. राजनीतिक रसूख के कारण वह नेटवर्क कंट्रोल करते थे और सभी फैसले लेते थे. दावा किया गया है कि अवैध रखम का हिसाब भी चैतन्य रखते थे. वसूली, चैनलाइजेशन और डिस्ट्रीब्यूशन के जुड़े सभी फैसले भी चैतन्य ही लेते थे.
200 करोड़ मिलने का दावा
दावा किया जा रहा है कि इस घोटाले में चैतन्य को करीब 200-250 करोड़ रुपए मिले हैं और इस पैसे का इस्तेमाल उन्होंने अपने रियल एस्टेट बिजनेस में किया है. इस घोटाले को लेकर ईडी ने चैतन्य बघेल के अलावा कई सीनियर आईएस अधिकारी, राजनेता और कारोबारियों को गिरफ्तार किया है. तत्कालीन आबकारी विभागक के मंत्री कवासी लखमा को भी ईडी ने गिरफ्तार किया है. इसके अलावा सीएम ऑफिस में पदस्थ रहीं सचिव सौम्या चौरसिया को भी गिरफ्तार किया गया है.
अभी खत्म नहीं हुई जांच
हालांकि जमानत मिलने के बावजूद मामले की जांच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. जांच एजेंसियां अपने स्तर पर आगे की कार्रवाई जारी रखेंगी. जमानत का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी को आरोपों से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है, बल्कि यह केवल अस्थायी राहत है. आगे अदालत में सुनवाई के दौरान सभी सबूतों और तथ्यों के आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा.
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है. समर्थकों ने फैसले को न्याय की जीत बताया है, जबकि विपक्ष जांच की दिशा और गति पर सवाल उठा रहा है. फिलहाल, हाईकोर्ट के इस आदेश को चैतन्य बघेल के लिए एक अहम कानूनी राहत माना जा रहा है.