'आरोप बेबुनियाद', 1 करोड़ रिश्वत के आरोप में घिरे IPS अधिकारी राहुल बंसल बोले

छत्तीसगढ़ के IPS अधिकारी राहुल बंसल पर साइबर फ्रॉड केस निपटाने के लिए 1 करोड़ लेने का आरोप लगा है. हालांकि उन्होंने आरोपों को बेबुनियाद बताया है.

@micchamasala
Sagar Bhardwaj

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में तैनात 2022 बैच के IPS अधिकारी राहुल बंसल ने अपने खिलाफ लगे 1 करोड़ रुपए की रिश्वत के आरोपों को खारिज किया है. शिकायत में दावा किया गया है कि साइबर धोखाधड़ी मामले को निपटाने के लिए बंसल समेत तीन पुलिसकर्मियों को कथित तौर पर रकम दी गई. बंसल ने कहा कि मामला अदालत के विचाराधीन है और उन्हें कानून पर पूरा भरोसा है.

21 लाख की शिकायत से शुरू हुई जांच

बंसल के मुताबिक, जुलाई 2025 में सरगुजा साइबर पुलिस स्टेशन में शेयर ट्रेडिंग से जुड़ी करीब 21 लाख रुपए की कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ था. जांच में पुलिस को एक संगठित गिरोह की जानकारी मिली, जो पहले दुबई से और बाद में भारत से गतिविधियां संचालित कर रहा था. आरोप है कि सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए लोगों को फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निवेश के लिए आकर्षित किया जाता था.

1,880 करोड़ के क्रिप्टो ट्रेल का दावा 

जांच में पैसों के लेनदेन की पड़ताल के दौरान एक फिनटेक कंपनी और कथित हवाला नेटवर्क तक पहुंचने का दावा किया गया. बंसल के अनुसार, करीब चार महीनों में क्रिप्टो वॉलेट से लगभग 1,880 करोड़ के लेनदेन का पता चला. पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े 23 आरोपियों को आठ राज्यों से गिरफ्तार करने और हजारों पन्नों की पांच चार्जशीट दाखिल करने की जानकारी दी है.


शिकायतकर्ता ने क्या कहा?

शिकायतकर्ता रवि मोहन गोस्वामी का आरोप है कि उन्हें शेयर बाजार और फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश का झांसा देकर 84 ऑनलाइन लेनदेन के माध्यम से 21.15 लाख रुपए की ठगी की गई. इसी मामले की जांच आगे बढ़ने पर फर्जी ट्रेडिंग ऐप, म्यूल बैंक खातों, डमी कंपनियों, पेमेंट गेटवे, हवाला चैनलों और क्रिप्टो ट्रांसफर से जुड़े कथित नेटवर्क का पता चला.

1 करोड़ भुगतान का आरोप

शिकायत के अनुसार, मई 2026 में कथित 1 करोड़ रुपए की रकम हवाला के जरिए दो किस्तों में दी गई. दोनों किस्तों में 50-50 लाख रुपए शामिल होने का दावा है. राहुल बंसल के अलावा असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार राठौर और कांस्टेबल अंशुल शर्मा के नाम भी शिकायत में हैं. दिल्ली की विशेष अदालत ने छत्तीसगढ़ पुलिस प्रमुख और CBI निदेशक से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है.

फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का जाल

चार्जशीट के अनुसार, गिरोह कथित तौर पर MoneyTrade365, SmartTrade365 और VTFX जैसे प्लेटफॉर्म को वास्तविक ट्रेडिंग ऐप की तरह पेश करता था. कॉलर्स निवेशकों से संपर्क कर उन्हें पैसे लगाने के लिए तैयार करते थे. शुरुआत में कुछ रकम लौटाकर भरोसा कायम करने और बाद में ज्यादा निवेश कराने का आरोप है. निकासी मांगने पर तकनीकी समस्या या अकाउंट होल्ड होने का बहाना बनाया जाता था.

डमी कंपनियों और खातों का इस्तेमाल

पुलिस के मुताबिक, ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों और संस्थाओं से गुजारकर उसकी असली मंजिल छिपाने की कोशिश की गई. जांच में डमी कंपनियों के नाम पर कॉरपोरेट खाते खुलवाने का आरोप है. एक कथित खाता प्रदाता पर कई बैंकों में 15 से अधिक खाते उपलब्ध कराने का आरोप है. जांच में KYC नियमों को दरकिनार करने के लिए फर्जी दस्तावेज और सिम कार्ड इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है.

जांच में सामने आई बड़ी रकम

IG दीपक झा के मुताबिक, पुलिस ने कथित सिंडिकेट से जुड़े अंशुल गिनोत्रा और गरवित जैन की पहचान की है, जिन्हें फरार बताया गया है. कथित सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट लिम्बानी अवनिक मंसुखभाई उर्फ चिराग के उपकरणों से 38 ट्रेडिंग वेबसाइटों का सोर्स कोड मिलने का दावा किया गया है. जांच के मुताबिक, दो प्लेटफॉर्म से जुड़े 4,109 यूजर्स और करीब 1,880 करोड़ रुपए के क्रिप्टो लेनदेन का ट्रेल सामने आया.

मामले की जांच जारी

जांचकर्ताओं के अनुसार, रकम का एक हिस्सा भुगतान प्रणालियों से निकालकर नकदी और फिर क्रिप्टोकरेंसी में बदला गया तथा कुछ डिजिटल संपत्तियों को विदेश भेजे जाने का संदेह है. पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों से जुड़े क्रिप्टो ट्रेल ने नेटवर्क के अन्य संभावित लाभार्थियों तक पहुंचने में मदद की है. वहीं, IPS अधिकारी राहुल बंसल ने रिश्वत के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए अदालत और कानून पर भरोसा जताया है.