'सांवला-मोटा' कहने पर पति ने मांगा तलाक, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने खारिज की अपील

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने आकाश घोष की तलाक की अपील खारिज कर दी. पति ने पत्नी पर उसे सांवला और मोटा कहकर अपमानित करने, क्रूरता करने और बिना उचित कारण अलग रहने का आरोप लगाया था.

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Km Jaya

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में पति की ओर से दायर तलाक की याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने कहा कि पत्नी द्वारा पति को कथित तौर पर सांवला और मोटा कहकर अपमानित करने के आरोप को इस मामले की परिस्थितियों में विवाह विच्छेद के लिए जरूरी मानसिक क्रूरता नहीं माना जा सकता. अदालत ने यह भी कहा कि पति अपने आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं कर सका.

मामला जांजगीर-चांपा जिले के चांपा निवासी 28 वर्षीय आकाश घोष और उनकी पत्नी पूजा सीत से जुड़ा है. दोनों का विवाह 7 मार्च 2019 को हुआ था. आकाश ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत पत्नी से विवाह विच्छेद की मांग की थी. पति ने पत्नी पर मानसिक क्रूरता करने और बिना उचित कारण अलग रहने का आरोप लगाया था.

पत्नी पर लगाए थे कई आरोप

पति का आरोप था कि शादी के करीब दो-तीन महीने बाद ही पत्नी उससे अलग रहने लगी थी. वह कथित तौर पर उसे सांवला और मोटा कहकर अपमानित करती थी. इसके अलावा पति ने आरोप लगाया कि पत्नी उसे झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देती थी और बार-बार अपने मायके चली जाती थी.


आकाश के मुताबिक, पत्नी के राजस्थान से लौटने के बाद गर्भ में पल रहे जुड़वां बच्चों का गर्भपात हो गया. इसके बाद वह उपचार के लिए रायगढ़ चली गई. पति का कहना था कि इलाज के लिए रायगढ़ जाने के बाद पत्नी वापस चांपा नहीं लौटी.

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने की. अदालत ने पति की ओर से लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार किया. कोर्ट ने पाया कि पति आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं कर सका.

अदालत ने कहा कि मामले में बताए गए कथित व्यवहार को मौजूदा परिस्थितियों में तलाक के लिए जरूरी मानसिक क्रूरता नहीं माना जा सकता. केवल आरोप लगाए जाने से विवाह विच्छेद का आधार साबित नहीं होता. इसके लिए आरोपों के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण होना जरूरी है.

परिवार न्यायालय का फैसला बरकरार

हाई कोर्ट ने पति की याचिका खारिज करते हुए परिवार न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा. अदालत ने 18 सितंबर को परिवार न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया. इस तरह आकाश घोष की ओर से पत्नी से विवाह विच्छेद की मांग पूरी नहीं हो सकी. यह मामला वैवाहिक विवादों में मानसिक क्रूरता के आरोपों को साबित करने के लिए साक्ष्यों के महत्व को भी सामने लाता है. हाई कोर्ट ने उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर पति की अपील पर फैसला सुनाया.