CGPSC भर्ती घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, बघेल के पूर्व OSD गिरफ्तार; 3 करोड़ की वसूली से जुड़ा मामला
CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2021 में कथित भर्ती घोटाले को लेकर ED ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के OSD रहे चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया है.
रायपुर: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी CGPSC परीक्षा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है. ED ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यालय में OSD रहे चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया है. एजेंसी ने उन्हें 11 सितंबर को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून यानी PMLA के तहत गिरफ्तार किया. रायपुर की विशेष PMLA अदालत ने चेतन बोरघरिया को छह दिन की ED हिरासत में भेज दिया है.
ED की जांच CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2021 में अभ्यर्थियों से चयन का भरोसा देकर कथित तौर पर तीन करोड़ रुपये से अधिक की रकम वसूलने से जुड़ी है. जांच एजेंसी के मुताबिक उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने कथित तौर पर परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों से यह रकम जुटाई थी.
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बघेल के OSD पद का इस्तेमाल करने का आरोप
जांच में सामने आया है कि अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और उनका चयन सुनिश्चित कराने का भरोसा दिया गया था. इस भरोसे के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यालय में OSD रहे चेतन बोरघरिया के नाम और पद का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया.
ED के अनुसार मामला केवल पैसों के लेनदेन तक सीमित नहीं था. अभ्यर्थियों को परीक्षा में फायदा पहुंचाने के लिए कथित तौर पर एक नेटवर्क तैयार किया गया था. प्रारंभिक परीक्षा से पहले कुछ अभ्यर्थियों को रायपुर के सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस में एकत्र किए जाने की बात जांच में सामने आई है. यहां उन्हें कथित रूप से लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया.
रिसॉर्ट में ठहराकर कराई गई तैयारी
जांच एजेंसी के मुताबिक इसके बाद कुछ अभ्यर्थियों को बारनवापारा अभयारण्य स्थित एक रिसॉर्ट में ठहराया गया. वहां मुख्य परीक्षा की तैयारी कराने और कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र के आधार पर कोचिंग देने की बात सामने आई है.
ED की वित्तीय जांच में चेतन बोरघरिया के बैंक खाते से जुड़े लेनदेन को अहम माना जा रहा है. एजेंसी के अनुसार संबंधित अवधि में उनके खाते में 170 अलग-अलग लेनदेन के जरिए कुल 66.64 लाख रुपये नकद जमा हुए. इसके अलावा चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच भी कई वित्तीय लेनदेन सामने आने का दावा किया गया है.
मोबाइल और डिजिटल उपकरण भी जब्त
चेतन बोरघरिया के खिलाफ गिरफ्तारी से पहले ED ने 1 सितंबर को उनके परिसरों पर तलाशी ली थी. इस दौरान मोबाइल फोन समेत कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए. एजेंसी के मुताबिक इनकी फोरेंसिक जांच में चेतन और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच हुई बातचीत सामने आई.
ED का दावा है कि इन बातचीत में वित्तीय लेनदेन, रकम वापस करने और भुगतान की मांग से जुड़ी बातें मिली हैं. एजेंसी बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और PMLA के तहत दर्ज बयानों को आपस में जोड़कर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है.
फिगरकेव कंपनी के लेनदेन भी जांच के घेरे में
जांच के दौरान फिगरकेव ई-कॉम (OPC) प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े वित्तीय लेनदेन भी ED की जांच के दायरे में आए हैं. एजेंसी को संदेह है कि कंपनी का इस्तेमाल कथित तौर पर रकम की लेयरिंग और उसे अलग-अलग माध्यमों से आगे बढ़ाने के लिए किया गया हो सकता है. कंपनी से जुड़े लेनदेन और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है.
CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2020 और 2021 में कथित भ्रष्टाचार, हेरफेर और अनियमितताओं को लेकर रायपुर EOW-ACB में FIR दर्ज हुई थी. बाद में CBI ने मूल अपराध की जांच अपने हाथ में ली. CBI ने तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की और मामले में आरोपपत्र भी पेश किया.
अब ED कथित अपराध से अर्जित रकम की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी कड़ियों की जांच कर रही है. एजेंसी के मुताबिक डिजिटल साक्ष्य, बैंकिंग रिकॉर्ड और बयानों के आधार पर चेतन बोरघरिया की कथित भूमिका सामने आई है. इसी आधार पर उन्हें PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया है. मामले में आगे की जांच जारी है.