शादीशुदा बेटियों के हक में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, शादी के बाद बेटी भी 'अनुकंपा नियुक्ति' की हकदार

बिलासपुर हाई कोर्ट ने कहा कि विवाहित बेटी को केवल शादी के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता. अदालत ने दो बेटियों को 90 दिनों में नियुक्ति देने का आदेश दिया.

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Meenu Singh

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर अहम फैसला सुनाया है. चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि किसी बेटी का विवाह हो जाना अपने आप में उसे अनुकंपा नियुक्ति के अधिकार से बाहर करने का आधार नहीं बन सकता. अदालत ने दो विवाहित बेटियों अंकिता मिश्रा और शीना डेविड के पक्ष में फैसला सुनाते हुए संबंधित बैंक को 90 दिनों के अंदर नियमों और उनकी शैक्षणिक योग्यता के अनुसार नियुक्ति देने का निर्देश दिया है.

विवाह नौकरी के अधिकार में बाधा नहीं

डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि केवल शादीशुदा होने के कारण बेटी को अनुकंपा नियुक्ति से अलग नहीं किया जा सकता. अदालत ने माना कि अगर शादीशुदा बेटों को यह सुविधा दी जा रही है, तो समान परिस्थिति में विवाहित बेटियों को इससे वंचित करना समानता के अधिकार के खिलाफ होगा. फैसले में पुराने सिंगल बेंच के आदेश और बैंक के अस्वीकृति आदेशों को रद्द कर दिया गया.

दो बेटियों की याचिका पर सुनवाई

मदन कुमार पांडा और शैलेन्द्र कुमार जॉन्सन के निधन के बाद उनकी विवाहित बेटियों ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था. छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक ने दोनों के आवेदन खारिज कर दिए. इसके बाद बेटियों ने अदालत का रुख किया. पहले सिंगल बेंच ने बैंक के पक्ष में फैसला दिया था, जिसके खिलाफ दोनों ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की.


निर्भरता को लेकर कोर्ट की अहम टिप्पणी

अदालत ने कहा कि विवाह के बाद यह मान लेना सही नहीं है कि बेटी अपने माता-पिता से सामाजिक या आर्थिक रूप से पूरी तरह अलग हो गई है. किसी महिला की वास्तविक स्थिति का आकलन केवल उसकी वैवाहिक स्थिति देखकर नहीं किया जा सकता. कोर्ट की इस टिप्पणी को अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें समानता और वास्तविक निर्भरता दोनों पहलुओं पर जोर दिया गया है.

90 दिनों में नियुक्ति का निर्देश

डिवीजन बेंच ने अंकिता मिश्रा और शीना डेविड को राहत देते हुए बैंक को 90 दिनों के भीतर नियुक्ति देने का निर्देश दिया है. नियुक्ति उनकी शैक्षणिक योग्यता और उस समय लागू नियमों के अनुसार की जाएगी. अदालत के इस फैसले से अनुकंपा नियुक्ति में विवाहित बेटियों के साथ भेदभाव के सवाल पर महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति सामने आई है.