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'नक्सलियों के सामने सरेंडर करो या मरो की स्थिति', छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर पर जवानों का बड़ा ऑपरेशन

यह ऑपरेशन छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के उसूर थाना क्षेत्र में कर्रेगुट्टा, नडपल्ली और पुजारी कांकेर की पहाड़ियों पर केंद्रित है. इसमें छत्तीसगढ़ पुलिस, तेलंगाना के ग्रेहाउंड कमांडो, सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन, डीआरजी, एसटीएफ और महाराष्ट्र की C-60 यूनिट सहित लगभग 5,000 से 10,000 जवान शामिल हैं.

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Gyanendra Sharma

छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा के घने जंगलों और पहाड़ियों में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन शुरू किया है. पिछले 72 घंटों से अधिक समय से नक्सलियों की कुख्यात बटालियन नंबर एक को चारों ओर से घेर लिया गया है. इस ऑपरेशन में हजारों जवानों की तैनाती, ड्रोन, हेलीकॉप्टर और सैटेलाइट निगरानी का उपयोग किया जा रहा है, जिससे नक्सलियों के लिए भागने का कोई रास्ता नहीं बचा है. यह इलाका नक्सलियों का सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता था, लेकिन अब यहां "सरेंडर करो या मरो" की स्थिति बन चुकी है.

यह ऑपरेशन छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के उसूर थाना क्षेत्र में कर्रेगुट्टा, नडपल्ली और पुजारी कांकेर की पहाड़ियों पर केंद्रित है. इसमें छत्तीसगढ़ पुलिस, तेलंगाना के ग्रेहाउंड कमांडो, सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन, डीआरजी, एसटीएफ और महाराष्ट्र की C-60 यूनिट सहित लगभग 5,000 से 10,000 जवान शामिल हैं. सुरक्षा बलों ने इस इलाके को पूरी तरह से सील कर दिया है, और रुक-रुककर होने वाली गोलीबारी के बीच नक्सलियों को घेरने की रणनीति अपनाई जा रही है.

सूत्रों के अनुसार, नक्सलियों ने इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बिछाए हैं, जिसके कारण सुरक्षा बल अत्यंत सावधानी के साथ आगे बढ़ रहे हैं. जवानों ने अब तक 100 से अधिक आईईडी को निष्क्रिय किया है. ड्रोन और सैटेलाइट के जरिए निगरानी की जा रही है, ताकि नक्सलियों की हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके.

नक्सलियों की बटालियन नंबर एक और बड़े नेता

बटालियन नंबर एक नक्सलियों का सबसे मजबूत और खूंखार समूह माना जाता है, जिसमें कई बड़े नक्सली नेता शामिल हैं. खबरों के मुताबिक, इस ऑपरेशन में हिड़मा, दामोदर, देवा, विकास जैसे शीर्ष नक्सली कमांडरों के साथ-साथ दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZCM), डिविजनल कमेटी मेंबर (DVCM) और एरिया कमेटी मेंबर (ACM) जैसे बड़े कैडर भी घिरे हुए हैं. ये नक्सली छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्रों में लंबे समय से आतंक का पर्याय बने हुए थे.