menu-icon
India Daily

'छत्तीसगढ़ आना मुझे घर जैसा लगता है...', बस्तर पंडुम 2026 का उद्घाटन करने पहुंची राष्ट्रपति मुर्मु का भावुक संबोधन

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बस्तर पंडुम 2026 का उद्घाटन करते हुए कहा कि जब भी मैं छत्तीसगढ़ आती हूं, मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं घर आ गई हूं. मुझे बस्तर पंडुम में आकर बहुत खुशी हो रही है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
'छत्तीसगढ़ आना मुझे घर जैसा लगता है...', बस्तर पंडुम 2026 का उद्घाटन करने पहुंची राष्ट्रपति मुर्मु का भावुक संबोधन
Courtesy: @rashtrapatibhvn x account

बस्तर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को बस्तर पंडुम कार्यक्रम का उद्घाटन किया और कहा कि बस्तर में विकास हो रहा है, जो चार दशकों से ज्यादा समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहा था. राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, 'जब भी मैं छत्तीसगढ़ आती हूं, मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं घर आ गई हूं. मुझे बस्तर पंडुम में आकर बहुत खुशी हो रही है.'

उन्होंने आगे कहा, 'मुझे मां दंतेश्वरी के क्षेत्र में आने का मौका मिला है और मैं इसे अपना बड़ा सौभाग्य मानती हूं. मेरा मानना ​​है कि 5,000 से ज्यादा लड़कियों ने समारोह में हमारा स्वागत किया और मैं उनकी आभारी हूं. मैं यहां की संस्कृति की भव्यता देख सकती हूं. मैं इस जगह के लोगों को सलाम करती हूं.'

वहां की मेहमाननवाजी पर क्या बोलीं?

यहां मुझे जो स्नेह मिलता है, वह बेमिसाल है. यह वह भूमि है जहां नायकों ने इसकी रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है. बस्तर की देवी, मां दंतेश्वरी ने इस भूमि को अपने हाथों से बनाया है. मैंने यहां की मेहमाननवाजी, संस्कृति और परंपराओं को देखा है. छत्तीसगढ़ को भारत का पिछड़ा क्षेत्र माना जाता था, लेकिन यह जगह संस्कृति से भरी हुई है.'

नक्सलवाद पर राष्ट्रपति मुर्मू ने क्या कहा?

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि बस्तर चार दशकों तक नक्सलवाद से प्रभावित रहा. 'आदिवासी और युवा सबसे ज्यादा पीड़ित हुए. केंद्र सरकार की बदौलत, अब बस्तर में असुरक्षा का माहौल खत्म हो रहा है. नक्सलवाद से जुड़े लोग हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं. पहले छत्तीसगढ़ में जिन लोगों ने नक्सलवाद का रास्ता अपनाया था, वे अब हथियार डालकर मुख्यधारा में लौट रहे हैं. सरकार नियाद नेलनाार योजना के जरिए हथियार सरेंडर करने वालों के लिए पुनर्वास का रास्ता दिखा रही है.' 

राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर में विकास हो रहा है. जो स्कूल सालों से बंद थे, वे फिर से खुल रहे हैं और बच्चे पढ़ रहे हैं. सड़कें बन रही हैं और स्वास्थ्य सुविधाएं लोगों तक पहुंच रही हैं. उन्होंने जोर देकर कहा, 'मैं उन लोगों की तारीफ करती हूं जिन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है और मुख्यधारा में लौट आए हैं.'

सरेंडर करने वाले नक्सली समाज से क्या कहा?

उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार यह पक्का कर रही है कि सरेंडर करने वाले नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल किया जाए. उन्होंने कहा, 'सरेंडर करने वाले नक्सलियों को कई तरह की ट्रेनिंग दी जा रही है और उनसे भारत के संविधान और लोकतंत्र पर पूरा भरोसा रखने की अपील की.  इस मौके पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रामेन डेका और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मौजूद थे.