छत्तीसगढ़ में 51 नक्सलियों ने किया सरेंडर, सिर पर था 1.61 करोड़ का ईनाम
हर सरेंडर करने वाले को तुरंत 50,000 रुपये की मदद दी गई. सरकार की नीति के मुताबिक उनका पूरा पुनर्वास किया जाएगा, जिसमें नौकरी, ट्रेनिंग और परिवार की मदद शामिल है.
छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी कामयाबी मिली है. शनिवार 7 फरवरी को बीजापुर और सुकमा जिलों में कुल 51 नक्सलियों ने पुलिस के सामने हथियार डाल दिए. इनमें 34 महिलाएं शामिल हैं. इन नक्सलियों पर कुल 1.61 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था. यह सरेंडर ऐसे समय हुआ जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जगदलपुर में बस्तर पंडुम 2026 उत्सव का उद्घाटन किया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिवसीय दौरे पर रायपुर पहुंचे.
सरकार की नीति से प्रभावित होकर किया आत्मसमर्पण
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने बताया कि बस्तर पुलिस की 'पूना मारगेम पुनर्वास पहल' के तहत बीजापुर जिले में 30 नक्सलियों ने सरेंडर किया, जिनमें 20 महिलाएं थीं. वहीं सुकमा जिले में 21 नक्सलियों ने मुख्यधारा में आने का फैसला किया, जिसमें 14 महिलाएं शामिल थीं. इन नक्सलियों ने बताया कि वे सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से बहुत प्रभावित हुए हैं. वे अब हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन जीना चाहते हैं.
बीजापुर में सरेंडर करने वाले कुछ प्रमुख नक्सलियों में बोटी पोडियम उर्फ मल्ला (23), सुखराम मदकम (24) और रीना पुणेम (25) शामिल हैं, जिन पर 8-8 लाख रुपये का इनाम था. पांच अन्य पर 5-5 लाख, 14 पर 2-2 लाख और बाकी पर 1-1 लाख का इनाम था. कुल 85 लाख रुपये का इनाम इन 30 पर था. सुकमा में सोढ़ी महेश (35), पोडियम राजू (30) और करम ममता (30) जैसे नक्सलियों पर 8-8 लाख का इनाम था. बाकी पर 5 लाख, 2 लाख और 3 लाख तक का इनाम घोषित था.
नक्सलियों ने जमा कराए हथियार
सरेंडर के दौरान सुकमा में नक्सलियों ने तीन एके-47 राइफल (8 मैगजीन सहित), दो सेल्फ लोडिंग राइफल, एक इंसास राइफल, पांच एक नली बंदूक, तीन बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (20 राउंड सहित), दस जिलेटिन स्टिक और 20 डेटोनेटर जमा कराए.
सरेंडर करने वाले को 50000 की मदद और नौकरी
हर सरेंडर करने वाले को तुरंत 50,000 रुपये की मदद दी गई. सरकार की नीति के मुताबिक उनका पूरा पुनर्वास किया जाएगा, जिसमें नौकरी, ट्रेनिंग और परिवार की मदद शामिल है.
पुलिस आईजी ने कहा कि सुदूर इलाकों में सुरक्षा शिविर, बेहतर सड़कें, विकास योजनाओं की पहुंच और लगातार अभियानों से नक्सलियों का आधार कमजोर हो रहा है. उन्होंने बाकी नक्सलियों से अपील की कि हिंसा का रास्ता सिर्फ दुख देता है. पूना मारगेम शांति और बेहतर जीवन का रास्ता है.
इस साल अब तक 300 नक्सलियों का सरेंडर
बता दें कि इस साल अब तक करीब 300 नक्सलियों ने सरेंडर किया है. 2025 में 1500 से ज्यादा नक्सलियों ने हथियार डाले थे. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह बस्तर में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में बड़ा कदम है. पिछले दो सालों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से यह नतीजा आया है. उन्होंने आगे कहा कि सरकार नक्सलवाद को 31 मार्च 2026 तक खत्म करने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रही है. यह घटना पूरे क्षेत्र के लिए उम्मीद की किरण है.