पटना: बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. मुख्यमंत्री के रूप में दसवीं बार शपथ लेने के करीब चार महीने बाद ही नीतीश कुमार अब राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं. उनके इस कदम को राज्य की सियासत में एक बड़े राजनीतिक पुनर्गठन के रूप में देखा जा रहा है, जिससे बिहार में पहली बार पूरी तरह भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बनने का रास्ता भी खुल सकता है.
सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे बिहार विधानसभा पहुंचकर राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे. उनके साथ जेडीयू नेता रामनाथ ठाकुर भी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में पर्चा भरेंगे. इस प्रक्रिया के दौरान कई बड़े राजनीतिक नेताओं की मौजूदगी की भी संभावना जताई जा रही है.
जानकारी के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस दौरान पटना में मौजूद रह सकते हैं और नामांकन प्रक्रिया के दौरान हिस्सा ले सकते हैं. नामांकन के बाद शाह, नीतीश कुमार और एनडीए के अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच बैठक होने की संभावना है. माना जा रहा है कि इस बैठक में बिहार में नई सरकार के गठन के संभावित फार्मूले पर चर्चा हो सकती है.
अगर नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित होते हैं और मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं, तो बिहार की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा मुख्यमंत्री पद पर दावा ठोक सकती है. विधानसभा में भाजपा के पास 89 सीटें हैं, जो उसे गठबंधन में सबसे मजबूत बनाती हैं. सूत्रों का कहना है कि भाजपा के नेतृत्व में सरकार बन सकती है, जबकि जेडीयू को दो उपमुख्यमंत्री पद दिए जाने का प्रस्ताव सामने आ सकता है.
पार्टी के कुछ विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, निशांत कुमार के राजनीति में आने की संभावना है, हालांकि उनकी भूमिका अभी तय नहीं हुई है. गुरुवार को होने वाली बैठक में उनके भविष्य और बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर भी चर्चा हो सकती है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक नीतीश कुमार 16 मार्च तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं, क्योंकि उसी दिन राज्यसभा चुनाव होना है. उसके बाद वे पद छोड़ सकते हैं, जिससे बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है.