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'सरकार' की हत्या का आरोप, उम्रकैद की मिली थी सजा; पढ़ें करोड़ों की रंगदारी मांगने वाले पप्पू यादव की क्राइम कुंडली

Pappu Yadav Crime Details: बिहार की पूर्णिया लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले पप्पू यादव के खिलाफ एक हफ्ते के अंदर केस दर्ज हो गया है. हाल में सामने आए चुनावी हलफनामे के मुताबिक उनके खिलाफ 40 से ज्यादा केस दर्ज हैं.

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Pappu Yadav Crime Details: लोकसभा चुनाव के नतीजे जब सामने आए, तो बिहार की 40 सीटों में से एक पूर्णिया से निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले पप्पू यादव को जीत मिली. सांसद बनने के एक हफ्ते से भी कम समय में उनके खिलाफ रंगदारी मांगने का केस दर्ज हो गया है. पूर्णिया के फर्नीचर कारोबारी ने पूर्णिया के नवनिर्वाचित सांसद पर 1 करोड़ रुपये से अधिक की रंगदारी मांगने का आरोप लगाया है. इस मामले में पप्पू यादव और उनके सहयोगी अमित यादव के खिलाफ FIR दर्ज की गई है.

फर्नीचर कारोबारी का आरोप है कि चुनाव के नतीजों वाले दिन ही पप्पू यादव ने उनसे 1 करोड़ की रंगदारी मांगी. पप्पू यादव के सहयोगी अमित यादव ने कहा कि अगर अगले 5 साल तक पूर्णिया में रहना है और शांति से कारोबार करना है, तो रकम दे दो, नहीं तो जान से भी हाथ धोना पड़ सकता है. शिकायतकर्ता की ओर से बताया गया कि इससे पहले भी पप्पू यादव की ओर से रंगदारी मांगी गई थी. 

फर्नीचर कारोबारी के मुताबिक, पप्पू यादव की ओर से 2 अप्रैल 2021 को 10 लाख रुपये, अक्टूबर 2023 में 15 लाख रुपये, 5 अप्रैल 2024 को 25 लाख रुपये की रंगदारी मांगी जा चुकी है. आखिरी बार 5 अप्रैल को कारोबारी को पप्पू यादव के आवास 'अर्जन आवास' बुलाया गया था. हालांकि, FIR दर्ज होने के बाद पप्पू यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि मेरे खिलाफ साजिश रची गई है. उन्होंने ये भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से मामले की जांच कराई जाए, अगर मैं दोषी हूं तो फांसी की सजा के लिए भी तैयार हूं.

ऐसा नहीं है कि पप्पू यादव के खिलाफ ये पहली शिकायत है. इससे पहले पप्पू यादव पर हत्या में शामिल होने से लेकर कई अन्य आरोप लग चुके हैं. आइए, पप्पू यादव की क्राइम कुंडली पर एक नजर डाल लेते हैं.

1999 में बिहार में तत्कालीन माकपा विधायक अजित सरकार की हत्या में पप्पू यादव का नाम आया था. घटना में अजित सरकार के अलावा उनके साथी अशफुल्ला खान और उनके ड्राइवर की भी हत्या की गई थी. मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई. सीबीआई ने पप्पू यादव को आरोपी बनाकर गिरफ्तार कर लिया गया. 2008 में उन पर हत्या के आरोप साबित हो गए और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई. हालांकि 2013 में उन्हें पटना हाई कोर्ट से राहत मिली और सबूतों के अभाव में हाई कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया.

इसके अलावा, पप्पू यादव के खिलाफ रंगदारी, बवाल, डकैती जैसे मामले भी दर्ज हैं. उन्हें दो मामलों में सजा मिल चुकी है, जबकि उनके खिलाफ 39 केस अभी भी पेंडिंग पड़े हुए हैं. इनमें आर्म्स एक्ट से लेकर मोटर व्हिकल एक्ट तक शामिल है. इसके अलावा, पप्पू यादव के खिलाफ किडनैपिंग, मारपीट, बूथ कैप्चरिंग जैसे मामले भी दर्ज हैं.

राजेश रंजन से पप्पू यादव बनने की कहानी

राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव का जन्म 24 दिसंबर 1967 को पूर्णिया में हुआ था. शुरुआत में उनका नाम राजेश रंजन था, लेकिन उनके दादा उन्हें पप्पू नाम से बुलाने लगे. बाद में वे इसी नाम से जाने जाने लगे. उनकी शुरुआती पढ़ाई पूर्णिया के आनंद मार्ग स्कूल से हुई, फिर बीएन मंडल कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन पूरा किया. फिर दिल्ली की इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से मास्टर्स किया. इसके बाद वे पटना आ गए और राजनीति में जम गए. 

पप्पू यादव ने 1990 में पहली बार निर्दलीय विधानसभा चुनाव लड़ा और विधायक बन गए. काफी कम समय में दबंगई के कारण पप्पू यादव की पहचान पूर्णिया से बाहर मधेपुरा, सुपौल और सीमांचल इलाकों तक फैल गई. 1991 में वे पहली बार पूर्णिया से सांसद बने और फिर 1996 और 1999 में भी सांसद चुने गए. 2004 में भी उन्होंने मधेपुरा संसदीय सीट से चुनाव लड़कर संसद पहुंचे. 

2014 में भी पप्पू यादव मधेपुरा से सांसद चुने गए. 2019 में अपनी जन अधिकार पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. इसके बाद 2024 में वे लोकसभा चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस में शामिल हुए, लेकिन पूर्णिया से टिकट नहीं मिलने के कारण निर्दलीय ही ताल ठोंक दिया. 4 जून को जब नतीजे आए, तो वे सांसद का चुनाव जीते और छठी बार संसद पहुंचे.