लालू के हनुमान रहे रामकृपाल यादव ने दिखाया दम, RJD चीफ ने जिस एकमात्र उम्मीदवार के लिए की रैली, उसे भी बुरी तरह हराया
दनोापुर में भाजपा प्रत्याशी रामकृपाल यादव ने 1,19,877 वोट पाकर राजद के रीत लाल राय को 29,133 वोटों से हराया. लालू प्रसाद ने रीत लाल के लिए विशेष रैली की, फिर भी जनता ने भाजपा के पक्ष में जनादेश दिया.
पटना: दनोापुर विधानसभा क्षेत्र में इस बार का चुनावीय मुकाबला बेहद दिलचस्प और रोमांचक रहा. वोटों की गिनती पूरी होने के साथ ही तस्वीर साफ हो गई. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रत्याशी रामकृपाल यादव ने कुल 1,19,877 वोट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की. वे अपने प्रतिद्वंदी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उम्मीदवार रीत लाल राय को 29,133 वोटों के भारी अंतर से हराने में सफल रहे. रीत लाल राय को कुल 90,744 वोट मिले, जो कि जीत के लिए काफी नहीं थे. आज भाजपा ने 90 सीटें, जदयू ने 84 सीटें और राजद ने 25 सीटें जीती हैं.
लालू ने केवल एक सीट पर किया प्रचार
इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने पूरे अभियान के दौरान केवल एक ही सीट दनोापुर के लिए विशेष तौर पर रीत लाल राय के पक्ष में रैली की. इससे राजनीतिक गलियारे में तरह-तरह की चर्चाएँ तेज हो गई थीं. माना जा रहा था कि लालू प्रसाद यादव की यह रणनीति रीत लाल राय को लाभ पहुंचा सकती है और मुकाबला कड़ा हो सकता है. लेकिन परिणाम ने साबित कर दिया कि उनके प्रयासों के बावजूद जनता का जनादेश भाजपा के पक्ष में रहा.
दनोापुर में इस बार मतदाताओं ने विकास, स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों की छवि को ध्यान में रखते हुए वोट दिया. रामकृपाल यादव, जिन्हें कभी लालू प्रसाद यादव का “पुराना हनुमान” कहा जाता था, इस बार अपने पूर्व राजनीतिक गुरु के प्रभाव को धूमिल करते हुए जीत के शिखर पर पहुंचे. हालांकि राजनीतिक जानकार इसे केवल व्यक्तिगत छवि की जीत नहीं, बल्कि भाजपा के संगठित चुनावी प्रबंधन और बूथ स्तर तक प्रभावी रणनीति का परिणाम मान रहे हैं.
चुनावी मैदान में रीत लाल राय की सक्रियता और स्थानीय समर्थन को भी किसी ने कम नहीं आंका था. पूरे चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने बेरोजगारी, स्थानीय बुनियादी ढांचे, अपराध नियंत्रण और युवाओं की भागीदारी जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. लालू प्रसाद यादव की रैली ने उनके अभियान में उत्साह भी भरा. लेकिन जिस निर्णायक वोट बैंक पर राजद उम्मीद लगाए बैठी थी, वह अंततः भाजपा की ओर झुक गया.
संगठनात्मक क्षमता और जमीनी पकड़
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दनोापुर का परिणाम आने वाले चुनावों में भी एक बड़ा संकेत माना जाएगा. यहां का चुनाव न केवल दो उम्मीदवारों के बीच टक्कर था, बल्कि इसे दो राजनीतिक विचारधाराओं की लड़ाई भी माना जा रहा था. भाजपा की जीत यह दर्शाती है कि पार्टी की संगठनात्मक क्षमता और जमीनी पकड़ अभी भी मजबूत है.
रामकृपाल यादव की यह जीत उन्हें दनोापुर की राजनीति में और अधिक प्रभावशाली बनाएगी. वहीं रीत लाल राय के लिए यह एक चुनौती भरा परिणाम है, जिससे वे भविष्य में अपने संगठन और रणनीति को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं.