बिहार में PM मोदी के नाम पर मंदिर बनाने का प्रस्ताव पास, ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड के फैसले से चर्चा तेज

बिहार राज्य ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड की पहली बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मंदिर बनाने का प्रस्ताव रखा गया. बोर्ड ने प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिससे राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई.

Social Media
Kanhaiya Kumar Jha

पटना: बिहार राज्य ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड की पहली बैठक में एक ऐसा प्रस्ताव सामने आया, जिसने व्यापक चर्चा को जन्म दे दिया. बैठक के दौरान बोर्ड के एक सदस्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मंदिर बनाने का सुझाव दिया. उनका तर्क था कि ट्रांसजेंडर समुदाय को अधिकार और सम्मान दिलाने में केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. प्रस्ताव को बैठक में मौजूद सदस्यों का समर्थन मिला और बोर्ड ने इसे मंजूरी दे दी. अब इस फैसले को लेकर विभिन्न स्तरों पर प्रतिक्रियाओं का इंतजार है.

बुधवार को समाज कल्याण विभाग के तहत गठित बिहार राज्य ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड की पहली बैठक आयोजित हुई. बैठक के दौरान बोर्ड सदस्य रंजन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मंदिर बनाने का प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा कि बिहार में ट्रांसजेंडर समुदाय का अपना कोई मंदिर नहीं है. ऐसे में इस दिशा में पहल की जानी चाहिए.

प्रस्ताव के पीछे यह दी गई दलील

रंजन सिंह ने बैठक में कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय को सम्मान और अधिकार दिलाने की दिशा में केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. उनके अनुसार इसी कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित मंदिर बनाने का सुझाव रखा गया. उन्होंने दावा किया कि बैठक में मौजूद सभी सदस्यों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया और इसे मंजूरी भी प्रदान कर दी.


बोर्ड का उद्देश्य क्या है?

बिहार सरकार ने अगस्त 2025 में बिहार राज्य ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड का गठन किया था. बोर्ड का उद्देश्य ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों की रक्षा करना, उनके सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए योजनाएं तैयार करना तथा उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों को मजबूत करना है. यह बोर्ड समाज कल्याण विभाग के अधीन कार्य करता है.

कानून के बाद पहली औपचारिक बैठक

रंजन सिंह ने बताया कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 लागू होने के बाद यह बोर्ड की पहली औपचारिक बैठक थी. उनके अनुसार इस कानून ने ट्रांसजेंडर समुदाय को संस्थागत पहचान और प्रतिनिधित्व देने का मार्ग प्रशस्त किया है. उन्होंने कहा कि अब समुदाय से जुड़े मुद्दों पर सीधे नीति स्तर पर चर्चा संभव हो रही है.

अब आगे की प्रक्रिया पर नजर

बोर्ड द्वारा प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद अब इस विषय पर आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया और संभावित निर्णयों पर सभी की नजर रहेगी. फिलहाल बैठक में प्रस्ताव पारित होने की जानकारी सामने आई है. इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है. आगे इस प्रस्ताव पर क्या कदम उठाए जाएंगे, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा.