बिहार के गन्ना किसानों की बदलेगी किस्मत! सकरी-रैयाम में फिर शुरू होंगी चीनी मिलें, जानें पूरा प्लान

 बिहार में बंद पड़ी सकरी और रैयाम चीनी मिलों को नए सहकारी मॉडल के तहत पुनर्जीवित किया जाएगा. परियोजनाओं से गन्ना किसानों को स्थानीय बाजार, रोजगार और बेहतर आय के अवसर मिलने की उम्मीद है.

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Sagar Bhardwaj

बिहार में लंबे समय से बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने की दिशा में राज्य सरकार ने अहम पहल की है. मधुबनी के सकरी और दरभंगा के रैयाम में नई सहकारी चीनी मिलें स्थापित की जाएंगी. इन परियोजनाओं का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 नवंबर को करेंगे. दोनों मिलों की स्थापना और संचालन की जिम्मेदारी इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) को सौंपी गई है.

सरकार ने तय किया व्यापक रोडमैप

बिहार के सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात के दौरान इन परियोजनाओं की जानकारी दी. राज्य सरकार का लक्ष्य केवल इन दो मिलों को शुरू करना नहीं है, बल्कि अन्य बंद चीनी मिलों को भी चरणबद्ध तरीके से पुनर्जीवित करना है. इस योजना को राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है.

सकरी में चीनी मिल के साथ बिजली उत्पादन

सकरी में पुरानी चीनी मिल की जमीन पर नई सहकारी चीनी मिल स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है. इसके साथ सह-विद्युत उत्पादन इकाई भी विकसित की जाएगी. वहीं, रैयाम में आदर्श शुगर कांप्लेक्स तैयार करने की योजना है. दोनों परियोजनाओं के लिए IPL के साथ समझौता हो चुका है और तय समयसीमा में उत्पादन शुरू करने की तैयारी है.


स्थानीय बाजार मिलने से किसानों को फायदा

चीनी मिलों के बंद होने से गन्ना किसानों को कई बार अपनी उपज दूर के बाजारों तक ले जानी पड़ती थी. नई मिलें शुरू होने पर स्थानीय स्तर पर गन्ने की खरीद बढ़ेगी. इससे किसानों का परिवहन खर्च और समय दोनों बच सकते हैं. सरकार को उम्मीद है कि स्थानीय खरीद की सुविधा मिलने से गन्ने की खेती के प्रति किसानों का भरोसा मजबूत होगा.

सहकारी समितियों से किसानों की भागीदारी

गन्ना किसानों को सहकारी व्यवस्था से जोड़ने के लिए चीनी मिल स्तर पर प्राथमिक गन्ना उत्पादक सहकारी समितियां बनाने की मंजूरी दी गई है. इसके लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू की गई है. सरकार का उद्देश्य किसानों को केवल गन्ना बेचने वाले उत्पादक के बजाय सहकारी व्यवस्था में सक्रिय भागीदार बनाना है.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर

सहकारिता विभाग के मुताबिक, पैक्स के कंप्यूटरीकरण और उन्हें बहुउद्देशीय सेवा केंद्र बनाने पर भी काम हो रहा है. राज्य में हजारों पैक्स के माध्यम से कॉमन सर्विस सेंटर, जन औषधि केंद्र और जन वितरण प्रणाली संचालित हो रही है. ‘बिहार राज्य सहकारिता नीति-2026’ के तहत कृषि, उद्योग और रोजगार को सहकारी मॉडल से जोड़ने की कोशिश की जा रही है.