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बिहार राज्यसभा चुनाव में तेजस्वी का मास्टरस्ट्रोक, 5वीं सीट पर फंसा पेंच! क्रॉस वोटिंग से होगा खेला?

बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए होने वाला मुकाबला तेजस्वी यादव के चुनावी मैदान में उतरने के ऐलान के बाद बेहद दिलचस्प हो गया है. संख्याबल के पेचीदा गणित और छोटे दलों के बदलते रुख के बीच दोनों गठबंधनों में क्रॉस वोटिंग का डर साफ नजर आ रहा है.

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बिहार राज्यसभा चुनाव में तेजस्वी का मास्टरस्ट्रोक, 5वीं सीट पर फंसा पेंच! क्रॉस वोटिंग से होगा खेला?
Courtesy: Social Media

पटना: बिहार की राजनीति में एक बार फिर 'खेला' होने की सुगबुगाहट तेज हो गई है. राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनाव ने उस वक्त रोचक मोड़ ले लिया, जब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एनडीए के सामने अपना उम्मीदवार उतारने का बिगुल फूंक दिया. गुरुवार को पटना में मीडिया से मुखातिब होते हुए तेजस्वी ने साफ किया कि महागठबंधन न केवल चुनाव लड़ेगा, बल्कि जीत के लिए जरूरी संख्याबल का भी इंतजाम कर लेगा. उम्मीदवारों के चयन पर उन्होंने कहा कि पार्टी वरिष्ठ नेताओं और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर जल्द ही नामों पर मुहर लगाएगी.

बिहार विधानसभा के समीकरणों को देखें तो एक राज्यसभा सीट सुरक्षित करने के लिए 41 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोटों की दरकार है. सत्ताधारी एनडीए के पास वर्तमान में 202 विधायक हैं, जिसके आधार पर उसकी 4 सीटों पर जीत सुनिश्चित मानी जा रही है. हालांकि, पांचवीं सीट के लिए एनडीए को 3 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी. वहीं दूसरी ओर, आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों के महागठबंधन को भी अपनी सीट बचाने या नई सीट जीतने के लिए कम से कम 6 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जुगत भिड़ानी होगी.

क्या ओवैसी और मायावती बनेंगे 'किंगमेकर'? 

तेजस्वी यादव की नजरें अब असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमईएम (AIMIM) के 5 और मायावती की बसपा (BSP) के एकमात्र विधायक पर टिकी हैं. लेकिन यह राह इतनी आसान भी नहीं दिख रही, क्योंकि ओवैसी की पार्टी ने पहले ही अपना प्रत्याशी उतारने की घोषणा कर दी है और बदले में तेजस्वी से ही समर्थन मांग लिया है. ऐसे में छोटे दलों का रुख चुनावी नतीजों को किसी भी दिशा में मोड़ सकता है.

क्रॉस वोटिंग का साया! 

सियासी गलियारों में सबसे बड़ी चिंता 'क्रॉस वोटिंग' को लेकर है. वैसे तो डर महागठबंधन के खेमे में ज्यादा बताया जा रहा है, लेकिन राजद विधायक भाई वीरेंद्र के एक बयान ने नई चर्चा छेड़ दी है. उन्होंने दावा किया कि यदि लालू यादव 'हिना शहाब' को प्रत्याशी बनाते हैं, तो राजद एक तीर से कई निशाने साध सकता है.

बता दें कि रिक्त हो रही 5 सीटों में से 3 फिलहाल एनडीए (जेडीयू और रालोमो) और 2 महागठबंधन (आरजेडी) के पास हैं. नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है जो 5 मार्च तक चलेगी. 16 मार्च को मतदान के साथ ही शाम तक परिणाम स्पष्ट हो जाएंगे.

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