बिहार: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अनुशासनहीनता पर बड़ा कदम उठाया है. पार्टी ने उन नेताओं को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है, जिन्होंने गठबंधन उम्मीदवारों के खिलाफ बगावत करते हुए मैदान में उतरने का फैसला किया. बीजेपी ने इसे संगठन विरोधी गतिविधि करार देते हुए कहा कि अनुशासन और निष्ठा पार्टी की मूल पहचान है, और जो इससे भटकेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.
बीजेपी ने साफ किया है कि पार्टी या एनडीए के खिलाफ चुनाव लड़ना सीधे तौर पर अनुशासनहीनता मानी जाएगी. इस कार्रवाई को लेकर पार्टी का कहना है कि चुनावी माहौल में संगठन की एकता और नेतृत्व के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखना सबसे अहम है. बीजेपी नेतृत्व का यह फैसला बाकी नेताओं के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है कि पार्टी लाइन से हटकर चलने वालों के लिए कोई जगह नहीं है.
बीजेपी ने जिन चार नेताओं को पार्टी से बाहर किया है, उनमें बहादुरगंज से वरुण सिंह, गोपालगंज से अनूप कुमार श्रीवास्तव, कहलगांव से पवन यादव और बड़हरा से सूर्य भान सिंह शामिल हैं. इन सभी पर एनडीए के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ने और पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करने का आरोप है. बीजेपी ने इन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है.
बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जनता दल यूनाइटेड ने भी 16 नेताओं को निष्कासित कर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है. इन नेताओं में वर्तमान विधायक, पूर्व मंत्री और अन्य प्रभावशाली चेहरे शामिल हैं, जिनका पार्टी की आधिकारिक टिकट के खिलाफ चुनाव लड़ना माना गया. पार्टी ने उन्हें 'एंटी-पार्टी गतिविधियों' और जेडीयू की विचारधारा का उल्लंघन करने का दोषी ठहराया. इस कदम से यह साफ हो गया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पार्टी अनुशासन बनाए रखने और चुनावी रणनीति पर सख्ती बरत रहे हैं.
जेडीयू के 16 नेताओं के निष्कासन का मुख्य कारण उनका पार्टी की आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ सक्रिय होना बताया गया है. गोपालपुर से विधायक नरेंद्र नीरज उर्फ गोपाल मंडल ने टिकट न मिलने पर स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में नामांकन किया. इसके अलावा पूर्व मंत्री हिमराज सिंह और अन्य नेता भी अलग-अलग सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं. पार्टी ने इन्हें 'पार्टी विरोधी गतिविधियों' और JDU के आदर्शों के खिलाफ काम करने का दोषी ठहराया है.