बिहार के मदरसों में हिंदुओं को बताया जा रहा काफिर? बढ़ते विवाद के बीच नीतीश के मंत्री ने किताब को बताया सही
Bihar Madarsa Board Controversy: बिहार के मदरसों में पढ़ाई जाने वाली किताबों में 'काफिर' शब्द के इस्तेमाल को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने आरोप लगाया है कि इन मदरसों में कट्टरपंथ फैलाया जा रहा है और किताबों में हिंदुओं को 'काफिर' कहा जा रहा है.
Bihar Madarsa Board Controversy: बिहार के मदरसों में पढ़ाई जाने वाली किताबों के पाठ्यक्रम को लेकर एक विवाद छिड़ा हुआ है. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने आरोप लगाया है कि इन मदरसों में पढ़ाई जाने वाली किताबों में कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा दिया जाता है.
किताब में हिंदुओं को बताया गया है काफिर?
उन्होंने विशेष रूप से किताब 'तालीमुल इस्लाम' का जिक्र करते हुए कहा कि इस किताब में हिंदुओं को 'काफिर' कहा गया है. 'न्यूज 18' की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस किताब की पेज संख्या 9 के अंदर वास्तव में यह लिखा है कि जो अल्लाह को नहीं मानते हैं उन्हें 'काफिर' कहा जाता है. इसी तरह, जो अन्य देवताओं की पूजा करते हैं उन्हें 'मुशरिक' कहा जाता है.
हालांकि, बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान ने इस बात का खंडन किया है. उन्होंने कहा कि 'काफिर' शब्द का मतलब सिर्फ इतना है कि जो ईश्वर को नहीं मानता है. उन्होंने यह भी कहा कि मदरसों में बच्चों को भाईचारा और देशभक्ति सिखाई जाती है.
नीतीश के मंत्री ने किताब को ठहराया सही
मीडिया से बातचीत में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है और किताब में जो लिखा है वो पूरे देश में पढ़ाया जा रहा है. इसमें केवल जानकारी है न कि किसी दूसरे धर्म के खिलाफ उकसावा.
उन्होंने कहा, 'ऐसा कुछ नहीं है. बिहार में ही नहीं बल्कि देश के किताब में ऐसा कुछ नहीं है. जो काफिर शब्द आया है उसके लिए मैं बता दूं कि काफिर का मतलब होता है कि जो खुदा को, भगवान को या ईश्वर को नहीं मानता हो उसको काफिर कहते हैं. किताब में किसी को गलत नहीं कहा गया है. कोई भेदभाव की बात नहीं है. मदरसों की नीयत साफ है और वो सभी को भाईचारा, मोहब्बत के साथ रहने, देश के लिए कुर्बान होने और दूसरों का सम्मान करने का तरीका सिखाते हैं.'
NCERT की तर्ज पर ही तैयार की गई हैं किताबें
बिहार के माध्यमिक शिक्षा विभाग के उप निदेशक अब्दूस सलाम अंसारी ने भी इस बात को दोहराया है कि मदरसों में पढ़ाई जाने वाली किताबें दिल्ली से छपकर आती हैं और इनमें कोई गलत जानकारी नहीं होती है. उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम NCERT के तर्ज पर तैयार किया गया है और NCPCR की तरफ से ऐसी कोई जानकारी अभी हमें नहीं दी गई है अगर कोई जानकारी होगी तो सरकार इसे देखेगी और कार्रवाई करेगी.
यह मामला राजनीतिक रूप से भी गरमा गया है. विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर हैं. वहीं, सरकार का कहना है कि वह इस मामले की जांच कर रही है.
इस पूरे मामले से कई सवाल उठते हैं:
- क्या मदरसों में पढ़ाई जाने वाली किताबों में वास्तव में कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा दिया जाता है?
- क्या 'काफिर' और 'मुशरिक' शब्दों का इस्तेमाल गलत है?
- क्या मदरसों के पाठ्यक्रम में बदलाव की जरूरत है?
यह एक मुश्किल मुद्दा है जिस पर सभी पक्षों को विचार करने की जरूरत है. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे बच्चे एक धर्मनिरपेक्ष और सहिष्णु समाज में रहें. मदरसों में दी जा रही शिक्षा को लेकर यह विवाद राजनीतिक रूप से भी गरमा गया है. कुछ लोग इसे सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खतरा मान रहे हैं, जबकि अन्य लोग इसे राजनीतिक फायदा उठाने का प्रयास बता रहे हैं.