'सिर्फ 3 से 6 महीने ही बचे हैं...', कैंसर को कैसे हराया? केविन पीटरसन के शो में युवराज सिंह ने बताया
युवराज सिंह ने बताया कि वर्ल्ड कप के दौरान उनकी तबीयत ठीक नहीं थी. कई मैचों में वह असहज नजर आए और एक मैच में उन्हें उल्टी भी हुई थी. हालांकि, उस समय किसी को बीमारी का पता नहीं चला.
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम ने साल 2011 में करीब 28 साल विश्व कप का खिताब जीता था. इस ऐतिहासिक जीत में युवराज ने अहम भूमिका निभाई थी. युवराज सिंह ने टूर्नामेंट में बल्ले और गेंद से दमदार खेल दिखाया था, जिसके लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट भी चुना गया था. इस दौरान वह गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. मैदान पर उन्हें उल्टी करते हुए भी देखा गया था. टूर्नामेंट के बाद युवराज सिंह को कैंसर होने की खबर सामने आई थी. वह दिन युवराज, उनके परिवार और उनके फैंस के लिए आसान नहीं थे.
युवराज ने मुश्किल दौर को किया याद
हाल ही में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह ने अपने जीवन के सबसे मुश्किल दौर को याद किया है. उन्होंने बताया कि 2011 वर्ल्ड कप जीतने के बाद उन्हें पता चला कि वह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं. उस समय उन्होंने अपनी जिंदगी को बहुत करीब से खतरे में देखा था. महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने 2011 का वर्ल्ड कप जीता था और युवराज सिंह उस टूर्नामेंट के सबसे बेहतरीन खिलाड़ी बने थे. मैदान पर उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन मैदान के बाहर वह एक बड़ी लड़ाई लड़ रहे थे, जिसका उन्हें खुद भी पूरा अंदाजा नहीं था.
वर्ल्ड कप में बिगड़ने लगी थी तबीयत
युवराज ने बताया कि वर्ल्ड कप के दौरान ही उनकी तबीयत ठीक नहीं थी. कई मैचों में वह असहज नजर आए और एक मैच में उन्हें उल्टी भी हुई थी. हालांकि, उस समय किसी को बीमारी का पता नहीं चला. टूर्नामेंट खत्म होने के बाद जब उन्होंने जांच कराई, तब कैंसर की पुष्टि हुई. डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि बीमारी काफी गंभीर है और इलाज तुरंत शुरू करना जरूरी है. युवराज के अनुसार, डॉक्टरों ने उन्हें यह भी कहा था कि अगर समय पर इलाज न हुआ तो हालात बहुत खराब हो सकते हैं.
जब टूट गए थे युवराज
युवराज ने केविन पीटरसन के एक शो में बताया कि जब डॉक्टरों ने कहा कि स्थिति बहुत नाजुक है, तो वह अंदर से टूट गए थे. उन्होंने बताया कि ट्यूमर उनके फेफड़ों और दिल के बीच था. डॉक्टरों ने यह भी चेतावनी दी थी कि कीमोथेरेपी न कराने पर दिल से जुड़ी गंभीर समस्या हो सकती है. उन्होंने कहा कि ऐसे समय में इंसान के मन में डर और अनिश्चितता भर जाती है और सबसे पहले यही ख्याल आता है कि आगे क्या होगा?
'टेस्ट क्रिकेट में वापसी के करीब थे'
युवराज ने यह भी बताया कि वह उस समय टेस्ट क्रिकेट में वापसी के करीब थे. उन्होंने इसके लिए कई साल इंतजार किया था और कई मैचों में टीम के साथ होते हुए भी खेलने का मौका नहीं मिला था. इसके बावजूद उन्हें इलाज के लिए अमेरिका जाना पड़ा, क्योंकि उस समय यही सबसे जरूरी था.
डॉक्टर की बात से मिली नई ताकत
यह दौर युवराज के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद कठिन था. लेकिन उनके डॉक्टर की एक बात ने उन्हें हिम्मत दी. युवराज ने बताया कि डॉक्टर ने उनसे कहा था कि इलाज के बाद वह ऐसे बाहर आएंगे जैसे उन्हें कभी कैंसर हुआ ही न हो. युवराज ने कहा कि जब वह पूरी तरह ठीक हो गए और डॉक्टरों ने उन्हें दोबारा क्रिकेट खेलने की इजाजत दी, तो उन्हें लगा जैसे उन्हें जिंदगी का दूसरा मौका मिला हो.