‘हर भारतीय को खेलना चाहिए’, अभिनव बिंद्रा ने बताया भारत के खेलों का अगला लक्ष्य
अभिनव बिंद्रा ने कहा कि भारत में खेलों की असली तरक्की केवल पदकों से नहीं, बल्कि बच्चों और आम लोगों की बड़ी भागीदारी से होगी.
ओलंपिक चैंपियन अभिनव बिंद्रा ने भारत में खेलों के भविष्य को लेकर बड़ा संदेश दिया है. उनका मानना है कि देश को केवल मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों पर ध्यान नहीं देना चाहिए. बच्चों को बचपन से खेल से जोड़ना, अच्छे कोच और शारीरिक शिक्षा की व्यवस्था मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है.
मेडल से आगे खेलों की बड़ी तस्वीर
अभिनव बिंद्रा ने कहा कि भारत में खेलों की सफलता का मतलब सिर्फ ओलंपिक या दूसरे बड़े टूर्नामेंट में मेडल जीतना नहीं होना चाहिए. उनके मुताबिक खेल का दायरा इससे कहीं बड़ा है और हर बच्चे तथा आम व्यक्ति को खेल से जोड़ना जरूरी है. उन्होंने कहा कि स्कूलों में ज्यादा बच्चों का खेलों से जुड़ना भविष्य के अच्छे खिलाड़ियों के लिए मजबूत आधार तैयार कर सकता है. बिंद्रा ने शारीरिक शिक्षा शिक्षकों की भूमिका को भी अहम बताया और कहा कि बच्चों का खेल के साथ पहला अनुभव अच्छा होना चाहिए, क्योंकि यही अनुभव आगे चलकर उनके खेल के प्रति नजरिए को तय करता है.
बच्चों को मिले अच्छा माहौल
बिंद्रा ने अपने बचपन का उदाहरण देते हुए माता-पिता की भूमिका पर भी बात की. उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता ने उन्हें ऐसा माहौल दिया, जहां हार या असफलता को लेकर डर नहीं था और उन्हें अपने फैसले लेने की आजादी मिली. बिंद्रा के मुताबिक बच्चों को केवल जीत के लिए तैयार करने के बजाय उन्हें खेल का आनंद लेने और उससे सीखने का मौका देना चाहिए. उनका कहना है कि अगर बच्चे का खेल से जुड़ाव शुरू से ही सकारात्मक रहा, तो वह लंबे समय तक शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा ले सकता है. इससे देश में खेल संस्कृति मजबूत होगी और युवाओं की सेहत पर भी अच्छा असर पड़ेगा.
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मजबूत नींव से तैयार होंगे चैंपियन
बिंद्रा ने कहा कि भारत के पास खेलों में आगे बढ़ने का बड़ा मौका है और आने वाला दशक इस दिशा में अहम हो सकता है. इसके लिए बच्चों की बड़ी संख्या को खेलों तक पहुंचाना जरूरी है. उन्होंने कहा कि खेल शारीरिक निष्क्रियता को कम करने के साथ देश की युवा आबादी को स्वस्थ रखने में भी मदद कर सकता है. उनके मुताबिक चैंपियन तैयार करने से पहले खेलों की मजबूत नींव बनानी होगी. IAMGAME का विजन भी इसी सोच से जुड़ा है, जिसमें बच्चों, माता-पिता, कोच और खिलाड़ियों को साथ लाकर खेलों में भागीदारी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.