नेपाल बाढ़ पर चीन की 'चुप्पी' पर सवाल, समय पर चेतावनी मिलती तो बच सकती थीं कई जानें?

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच चीन पर समय रहते चेतावनी नहीं देने के आरोप लगे हैं. रिपोर्टों के मुताबिक तिब्बत में बाढ़ पहले आ चुकी थी, जबकि नेपाल को सूचना बाद में मिली.

X/@WeatherMonitors
Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: नेपाल के उत्तरी हिस्से में आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है. रसुवा और आसपास के जिलों में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. इस त्रासदी के बीच चीन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. नेपाली सूत्रों का दावा है कि तिब्बत के केरुंग क्षेत्र में बाढ़ आने के काफी देर बाद नेपाल को इसकी जानकारी मिली. इसी देरी को लेकर नेपाल में नाराजगी बढ़ रही है.

चीनी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, तिब्बत के केरुंग काउंटी में स्थानीय समय के मुताबिक सुबह करीब 10.30 बजे बाढ़ आ गई थी. यह इलाका नेपाल के रसुवा से लगभग 25 से 30 किलोमीटर दूर बताया जाता है. दोनों देशों के समय में 2 घंटे 15 मिनट का अंतर है. इस हिसाब से नेपाल के समयानुसार वहां बाढ़ करीब सुबह 8.15 बजे आ चुकी थी. नेपाली सूत्रों के अनुसार, नेपाल को इसकी सूचना करीब 9 बजे मिली.

45 मिनट की देरी पर उठे सवाल

नेपाल में आरोप लगाया जा रहा है कि चीन की ओर से बाढ़ की आधिकारिक चेतावनी समय पर साझा नहीं की गई. दावा है कि करीब 45 मिनट की देरी के कारण नेपाली प्रशासन को तैयारी और बचाव अभियान शुरू करने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका. हालांकि, इस दावे और सूचना साझा करने की प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है. आपदा के बाद अब इसी समय अंतर को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.


नेपाल में चीन के खिलाफ नाराजगी

घटना को लेकर नेपाल में चीन के प्रति नाराजगी सामने आई है. विदेश मामलों के पत्रकार परशुराम काफ्ले ने सोशल मीडिया पर कहा कि समय पर चेतावनी नहीं मिलने से नेपाल को भारी नुकसान उठाना पड़ा. उन्होंने दोनों देशों के संबंधों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि नेपाल को एकतरफा रिश्ते की कीमत क्यों चुकानी चाहिए. हालांकि, यह उनकी व्यक्तिगत प्रतिक्रिया है और चीन की ओर से लगाए गए आरोपों पर आधिकारिक जवाब का विवरण इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है.

रसुवा में भारी तबाही

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार, रसुवा में भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने से कई इलाके प्रभावित हुए. तिमुरे, स्याफ्रुबेसी, बेत्रावती, त्रिशूली बत्तर और देवीघाट में नुकसान की जानकारी सामने आई है. रसुवा में नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 32 जवानों के भी लापता होने की बात कही गई है. राहत और बचाव के लिए टीमें लगाई गई हैं, लेकिन खराब मौसम अभियान में लगातार बाधा डाल रहा है.

हेलीकॉप्टरों से चल रहा बचाव अभियान

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने के लिए नेपाली सेना और निजी कंपनियों के हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं. काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से कई उड़ानें रसुवा के लिए भेजी गई हैं. इनमें कुछ हेलीकॉप्टर घायलों को लेकर वापस लौटे हैं. खराब मौसम के कारण कई उड़ानों को बीच रास्ते से लौटना पड़ा. संचार व्यवस्था प्रभावित होने से बचाव दलों के सामने मुश्किलें और बढ़ गई हैं.