'मैं इम्पोस्टर सिंड्रोम से गुजर...' किंग कोहली ने बयां किया अपना दर्द, द्रविड़ और विक्रम राठौड़ ने दिया साथ
दुनिया भर में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और मजबूत मानसिकता के लिए पहचाने जाने वाले Virat Kohli ने हाल ही में अपने करियर के एक ऐसे पहलू का खुलासा किया. कोहली ने बताया कि करियर के सबसे सफल दौर में भी उन्हें खुद पर संदेह होता था और वह 'इम्पोस्टर सिंड्रोम' जैसी मानसिक स्थिति से गुजर चुके हैं.
नई दिल्ली: दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली को भारत की ODI टीम की बैक बोन कहा जाता है. वह ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने अपने करियर में अपने अकेले के दम पर भारत को कई मैच जिताए हैं. अब वह लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर से नीली जर्सी में नजर आएंगे. लेकिन उससे पहले कोहली ने एक ऐसे सच पर से पर्दा उठाया है जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे. कोहली ने बीती शाम एक इवेंट में टेस्ट से अपनी कप्तानी खत्म होने के बाद के तनाव के बारे में खुलकर बात की.
दुनिया भर में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और मजबूत मानसिकता के लिए पहचाने जाने वाले Virat Kohli ने हाल ही में अपने करियर के एक ऐसे पहलू का खुलासा किया, जिसके बारे में शायद ही कभी खुलकर बात होती है. कोहली ने बताया कि करियर के सबसे सफल दौर में भी उन्हें खुद पर संदेह होता था और वह “इम्पोस्टर सिंड्रोम” जैसी मानसिक स्थिति से गुजर चुके हैं.
तीन कैलेंडर ईयर में रहा शतकों का सूखा
पूर्व भारतीय कप्तान विराट कोहली जिन्होंने अपने बल्ले से लाखों फैंस को खुशी दी है उन्होंने एक दौर ऐसा भी देखा है जब लगभग तीन सालों तक एक प्रारूप में उनके बल्ले से एक भी शतक नहीं आया था. दरअसल कोहली को 2020 से 2022 के बीच टेस्ट क्रिकेट में गिरावट का सामना करना पड़ा, इस दौरान उन्होंने तीन कैलेंडर वर्षों तक इस प्रारूप में एक भी शतक नहीं बनाया.
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इसके बाद विराट ने टी20I कप्तानी से इस्तीफा दे दिया. जिसके उन्होंने बाद 2022 की शुरुआत में टेस्ट कप्तानी भी छोड़ दी, इससे पहले उन्होंने वनडे कप्तानी भी छिन ली गई थी.
कप्तानी ने बढ़ाया मानसिक दबाव
कप्तानी के कारण लगातार कोहली के प्रदर्शन में गिरावट आ रही थी. उन्होंने माना कि कप्तानी केवल एक पद नहीं बल्कि जिम्मेदारी है. जब आप कप्तान होते हो तो आप अपने बारे में नहीं बल्कि पूरी टीम पर ध्यान देते हो. मैं खुद कप्तानी के दौरान अपनी मानसिक स्थिति पर ध्यान नहीं दे पा रहा था. उन्होंने कहा कि करीब नौ सालों तक किसी ने उनसे यह तक नहीं पूछा कि वह मानसिक रूप से कैसे हैं.
द्रविड़ और राठौर ने दिया मानसिक सहारा
रनमशीन ने बताया कि जब वह मानसिक तनाव (इम्पोस्टर सिंड्रोम) से जूझ रहे थे तो भारत के दिग्गज पूर्व क्रिकेटर राहुल द्रविड़ और विक्रम राठौर ने उन्हें समझा और उनका साथ दिया. उन्होंने कहा कि, 'राहुल भाई मेरी बात समझते थे क्योंकि उन्होंने खुद उच्चतम स्तर पर इसका अनुभव किया था. विक्रम भी कई सालों से क्रिकेट के क्षेत्र में थे. वे मेरी भावनाओं को समझते थे और उन्होंने मानसिक रूप से मेरा पूरा ख्याल रखा. इससे मुझे ऐसी स्थिति मिली जहां मैं फिर से अपने क्रिकेट का आनंद ले सका.'