'अगर वो फ्लॉप होता तो बिहार क्रिकेट बर्बाद हो जाता...', वैभव सूर्यवंशी के कोच का बड़ा दावा, खोल दिए कई बड़े राज
15 साल के वैभव सूर्यवंशी के भारतीय टीम में चयन से बिहार क्रिकेट को नई पहचान मिली है. कोच मनीष ओझा ने कहा कि अगर वैभव सफल नहीं होते, तो बिहार क्रिकेट को कई साल पीछे कर देता.
भारतीय क्रिकेट में एक नया सितारा तेजी से चमक रहा है और उसका नाम है वैभव सूर्यवंशी. सिर्फ 15 साल की उम्र में भारतीय टी20 टीम में जगह बनाकर उन्होंने न सिर्फ अपनी प्रतिभा साबित की है. आईपीएल 2026 में शानदार प्रदर्शन के बाद अब वैभव अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की दहलीज पर खड़े हैं. उनके चयन के बाद सबसे भावुक प्रतिक्रिया उनके कोच मनीष ओझा की रही.
बिहार क्रिकेट की उम्मीद बने वैभव
वैभव सूर्यवंशी की सफलता सिर्फ एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं है. यह पूरे बिहार क्रिकेट की जीत मानी जा रही है. उनके कोच मनीष ओझा का कहना है कि राज्य में क्रिकेट के लिए सुविधाएं अभी भी सीमित हैं. ऐसे माहौल में किसी खिलाड़ी का राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना आसान नहीं होता. ओझा के मुताबिक वैभव उन हजारों बच्चों की उम्मीद बन गए हैं, जो छोटे शहरों और गांवों से निकलकर क्रिकेट में बड़ा सपना देखते हैं. उन्होंने साफ कहा कि अगर वैभव इस स्तर पर सफल नहीं होते, तो बिहार के युवा खिलाड़ियों का भरोसा भी कमजोर पड़ जाता.
आईपीएल में दिखाया अपना दम
आईपीएल 2026 वैभव के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 776 रन बनाए और 72 छक्के जड़कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास और निडरता साफ दिखाई दी. यही वजह रही कि चयनकर्ताओं ने उम्र को नजरअंदाज करते हुए उन्हें सीधे भारतीय टीम में मौका दिया.
इस सीजन में वैभव के बल्ले ने दिखाया दमः
- 776 रन
- 72 छक्के
- 1 शतक
- 5 अर्धशतक
विराट की तारीफ
वैभव के प्रदर्शन ने भारतीय क्रिकेट के बड़े नामों को भी प्रभावित किया. विराट कोहली ने उनकी बल्लेबाजी की खुलकर सराहना की और उनके खेल की तारीफ करते हुए खास टिप्पणी भी की. दूसरी तरफ, राजस्थान रॉयल्स के साथ रहते हुए उन्हें राहुल द्रविड़ का मार्गदर्शन मिला. इतनी कम उम्र में मिली लोकप्रियता के बावजूद वैभव का पूरा ध्यान अपने खेल पर बना हुआ है.
कोच की जिंदगी भी बदल गई
वैभव की सफलता ने उनके कोच मनीष ओझा को भी नई पहचान दिलाई है. जो लोग पहले बिहार क्रिकेट की चर्चा तक नहीं करते थे, वे आज वैभव और उनके कोच की कहानी सुनना चाहते हैं. ओझा बताते हैं कि अब रोजाना कई अभिभावक अपने बच्चों को लेकर उनके पास पहुंच रहे हैं. सभी की उम्मीद है कि उनका बच्चा भी वैभव की तरह भारतीय टीम तक पहुंचे.
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