'खिलाड़ियों को भी कुछ जिम्मेदारी लेनी चाहिए', बैडमिंटन प्लेयर्स से निराश हैं कोच, कह दी बड़ी बात
Paris Olympics 2024: प्रकाश पादुकोण पेरिस 15 सदस्यीय भारतीय बैडमिंटन टीम के साथ बतौर मेंटोर पेरिस गए हैं. बैडमिंटन खिलाड़ियों के प्रदर्शन से वो निराश हैं. लक्ष्य सेन की हार के बाद उन्होंने साफ-साफ कह दिया कि चौथा नंबर नहीं चाहिए, पदक जीतना था.
Paris Olympics 2024: इन दिनों पेरिस में ओलंपिक 2024 की धूम है. भारत के 117 एथलीट मैदान में उतरे हैं. इस बार बैडमिंटन में भारतीय खिलाड़ियों ने निराश किया. 5 अगस्त को लक्ष्य सेन भी पुरुष सिंगल्स के सेमीफाइनल में ब्रॉन्ज मेडल जीतने से चूक गए. उन्हें उन्हें मलेशिया के जी जिया ली (Zii Jia Lee) ने 21-13, 16-21, 11-21 से हराया है. लक्ष्य सेन की हार के साथ बैडमिंटन में इस बार भारत का मेडल जीतने का सपना टूट गया. लक्ष्य सेन के मैच के बाद पूर्व दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण ने काफी निराश और नाराजगी जाहिर की है.
सोमवार को लक्ष्य सेन के मैच के बाद मीडिया से बातचीत में कहा, 'उन्होंने (लक्ष्य) अच्छा खेला. मैं थोड़ा निराश हूं. वे हमेशा तेज खेलने वाले खिलाड़ी के सामने थोड़ा असहज हो जाते हैं. इस पर उन्हें काम करने की जरूरत है. प्रकाश पादुकोण ने लक्ष्य सेन को लेकर कहा दोनों मैच के दौरान उनका (लक्ष्य) आत्मविश्वास कम था. कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जिन पर हमें निश्चित रूप से काम करने की जरूरत है. मुझे निराशा है कि हम बैडमिंटन में एक भी पदक नहीं जीत सके.
सरकार ने सब किया, खिलाड़ियों को जिम्मेदारी लेनी चाहिए
प्रकाश पादुकोण ने आगे कहा कि इस बार सरकार, SAI (भारतीय खेल प्राधिकरण), TOPS (टारगेट ओलिंपिक पोडियम स्किम) सभी ने अपना काम किया है. मुझे नहीं लगता कि सरकार, खेल मंत्रालय, SAI, TOPS से ज्यादा कोई और कुछ कर सकता था. अब समय आ गया है कि खिलाड़ियों को भी कुछ जिम्मेदारी लेनी चाहिए.
इस बार कैसा रहा बैडमिंटन में भारत का प्रदर्शन
भारत के लिए ओलंपिक में 2 मेडल जीतने वाली पीवी सिंधु महिला एकल के राउंड 16 में हार गई थीं. उन्हें चीन की बिंग जियाओ ने हराया था. सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी पुरुष युगल क्वार्टर फाइनल में मलेशिया के आरोन चिया और सोह वूई यिक से हार गए थे. एचएस प्रणय को राउंड ऑफ 16 में लक्ष्य सेन ने बाहर कर दिया था, जबकि अश्विनी पोनप्पा और तनिषा क्रैस्टो महिला युगल स्पर्धा में ग्रुप स्टेज से आगे भी नहीं बढ़ पाईं.