इंग्लैंड दौरा भारतीय टी20 टीम के लिए पूरी तरह निराशाजनक साबित हुआ. आखिरी मुकाबले में 56 रन की हार के साथ टीम ने सीरीज 0-4 से गंवा दी. इससे पहले आयरलैंड के खिलाफ भी भारत को हार मिली थी. लगातार खराब नतीजों के बाद टीम की नंबर-1 टी20 रैंकिंग भी चली गई.
साउथेम्प्टन में खेले गए आखिरी टी20 मुकाबले में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए तीन विकेट पर 257 रन का बड़ा स्कोर बनाया. जोस बटलर ने 131 रन की शानदार पारी खेली. वहीं कप्तान हैरी ब्रूक ने 45 गेंदों में नाबाद 95 रन बनाए. दोनों ने रिकॉर्ड साझेदारी कर भारतीय गेंदबाजी को पूरी तरह दबाव में डाल दिया. जवाब में भारत की शुरुआत फिर खराब रही और टीम लगातार विकेट गंवाती रही. ईशान किशन, तिलक वर्मा और श्रेयस अय्यर ने कुछ अच्छे शॉट जरूर लगाए लेकिन टीम 201 रन ही बना सकी. इस जीत के साथ इंग्लैंड ने सीरीज 4-0 से अपने नाम कर ली और भारत से नंबर-1 टी20 टीम का स्थान भी छीन लिया.
पूरे दौरे में भारत की सबसे बड़ी परेशानी स्थिर टीम संयोजन की रही. सलामी बल्लेबाज लगातार जल्दी आउट हुए और मध्यक्रम भी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सका. बल्लेबाजी क्रम में कई बदलाव किए गए लेकिन कोई मजबूत संयोजन नहीं बन पाया. गेंदबाजी में भी टीम लय नहीं पकड़ सकी. तेज गेंदबाज और स्पिनर दोनों ही रन रोकने में नाकाम रहे. आखिरी मैच में कई गेंदबाज महंगे साबित हुए और इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने हर मौके का फायदा उठाया. भारत की रणनीति भी मैच दर मैच बदलती रही, जिसका असर पूरे दौरे में साफ दिखाई दिया.
भारत इस दौरे से एक भी मुकाबला जीते बिना लौटा. पहले आयरलैंड के खिलाफ 0-2 से सीरीज हार मिली और फिर इंग्लैंड ने 0-4 से क्लीन स्वीप कर दिया. लगातार हार के बाद टीम की टी20 रैंकिंग पर भी असर पड़ा. अब टीम प्रबंधन और कप्तानी को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. क्रिकेट जानकारों का मानना है कि खिलाड़ियों की बार-बार अदला-बदली और स्पष्ट योजना की कमी टीम पर भारी पड़ी.