दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में रविवार को जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज का 84वां प्राकट्य महोत्सव 'राष्ट्रोत्कर्ष दिवस' के रूप में बड़े उत्साह के साथ मनाया गया. इस भव्य समारोह में योग गुरु बाबा रामदेव, कुलपति प्रो. योगेश सिंह और देश-विदेश से आए कई संत-महात्मा शामिल हुए. इस मंच से बाबा रामदेव ने सामाजिक सद्भाव और देश के अल्पसंख्यकों को संबोधित करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा बयान दिया.
समारोह को संबोधित करते हुए बाबा रामदेव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश के किसी भी मुसलमान को डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा, 'हमारे मजहब और इबादत के तरीके भले ही अलग हो सकते हैं, लेकिन हमारे पूर्वज एक ही हैं.' उन्होंने मुसलमानों से अपने पूर्वजों और ऋषि-मुनियों की परंपरा को अपनाने का आह्वान किया. रामदेव ने कहा कि कोई भी व्यक्ति चाहे दाढ़ी रखे या अपने हिसाब से वस्त्र पहने, लेकिन उसे अपना चरित्र और जड़े अपने सनातनी पूर्वजों जैसी ही रखनी चाहिए.
#WATCH | Delhi: Yog Guru Baba Ramdev says, "There is a Deoband near our Haridwar. I was invited there in 2009, and I told them, our religions may differ, but our ancestors are the same. There is no need for anyone to fear the concept of a 'Hindu Rashtra'. The ancestors of us all… pic.twitter.com/1VwZjPfZvw
— ANI (@ANI) July 12, 2026
बाबा रामदेव ने 'हिंदू राष्ट्र' की चर्चाओं पर फैले भ्रम को दूर करते हुए आश्वस्त किया कि भारत के हिंदू राष्ट्र बनने से किसी भी समुदाय के नागरिक को कोई खतरा नहीं होगा. उन्होंने लोगों को आगाह किया कि कुछ तत्व मुसलमानों को यह कहकर डराते हैं कि हिंदू राष्ट्र बनने पर वे कहां जाएंगे, जबकि हकीकत में ऐसा कुछ नहीं है. उन्होंने प्राचीन गुरुकुल व्यवस्था को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया और कहा कि हर घर को संस्कारों का गुरुकुल बनना चाहिए.
कार्यक्रम के अंत में बाबा रामदेव ने देश की सांस्कृतिक और धार्मिक व्यवस्था को मजबूत करने का एक व्यावहारिक खाका पेश किया. उन्होंने बताया कि भारत में 5 लाख से अधिक मंदिर हैं. यदि राम मंदिर, काशी विश्वनाथ और वैष्णो देवी जैसे बड़े और संपन्न मंदिर आगे आएं, तो देश में हजारों गुरुकुल और गौशालाएं आसानी से संचालित की जा सकती हैं. कार्यक्रम में मौजूद सभी श्रद्धालुओं ने सनातन संस्कृति के संरक्षण और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को दोहराया.