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India Daily

दशक बदले लेकिन नहीं बदला सेलिब्रेशन, वीडियो में देखें कैसे हरमनप्रीत कौर ने 2025 में दिलाई 1983 के सुनील गावस्कर की याद

भारत की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने विमेंस वर्ल्ड कप 2025 जीतने के बाद खास तरीके का जश्न मनाया. उनके इस जश्न ने सुनील गावस्कर की याद दिला दी.

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दशक बदले लेकिन नहीं बदला सेलिब्रेशन, वीडियो में देखें कैसे हरमनप्रीत कौर ने 2025 में दिलाई 1983 के सुनील गावस्कर की याद
Courtesy: @BCCIWomen

नवी मुंबई: भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने 2025 में एक नया इतिहास रच दिया. हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में टीम ने महिला वनडे विश्व कप जीत लिया. फाइनल मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका को 52 रनों से हराकर भारत ने लंबे इंतजार को खत्म किया. 

2 नवंबर में नवी मुंबई के डॉ डीवाई पाटिल स्टेडियम में भरी भीड़ के सामने यह जीत बेहद खास थी. हालांकि, जीत का असली जादू हरमनप्रीत के एक छोटे से इशारे में छिपा था, जो पुराने फैंस को 1983 की याद दिला गया.

जीत का आखिरी पल और वो खास कैच

मुकाबला रोमांचक मोड़ पर था. दक्षिण अफ्रीका की टीम 299 रनों का पीछा कर रही थी. आखिरी विकेट बचा था. नादिन डी क्लर्क ने कवर की तरफ एक ऊंची ड्राइव मारी.

गेंद हवा में उछली और लग रहा था कि वह फील्डर के ऊपर से निकल जाएगी. हालांकि, हरमनप्रीत कौर ने सही समय पर छलांग लगाई और गेंद को हवा में ही लपक लिया. यह कैच भारत की जीत का फैसला कर गया.

टीम के साथी दौड़कर आए और जश्न मनाने लगे. हरमनप्रीत ने मुस्कुराते हुए गेंद उठाई और उसे अपनी जेब में डाल लिया. यह छोटा सा काम देखते ही क्रिकेट प्रेमियों को 1983 का विश्व कप फाइनल याद आ गया. उस समय सुनील गावस्कर ने भी जीत की गेंद जेब में रखी थी.

गावस्कर की यादें और सलाह

सुनील गावस्कर ने मैच के बाद एक इंटरव्यू में इस पल पर बात की. उन्होंने कहा, "हरमनप्रीत ने कैच लेकर गेंद जेब में डाली, ठीक वैसे ही जैसे 1983 में किसी ने किया था. मुझे उम्मीद है कि वह अपनी टीम की सभी साथियों से ऑटोग्राफ लेगी, शायद दक्षिण अफ्रीका की खिलाड़ियों से भी. यह गेंद जीवनभर की याद बन जाएगी."

1983 में सुनील गावस्कर का जश्न

1983 में कपिल देव की टीम ने वेस्टइंडीज को हराकर पहला विश्व कप जीता था. लॉर्ड्स के मैदान पर वह पल भारतीय क्रिकेट का सुनहरा अध्याय है. अब हरमनप्रीत कौर कपिल देव और महेंद्र सिंह धोनी के बाद तीसरी भारतीय कप्तान बन गईं, जिन्होंने वनडे विश्व कप उठाया.

दशकों का इंतजार खत्म हुआ लेकिन जश्न वही पुराना रहा. 1983 से 2025 तक, चार दशक बीत गए. क्रिकेट बदल गया, खिलाड़ी बदल गए, लेकिन जीत का जश्न वही रहा. गेंद जेब में डालना एक छोटा इशारा है लेकिन यह भावनाओं की गहराई बताता है.