'इंग्लैंड को जुआरी कोच ने डुबो दिया...,' एशेज में हार के बाद ब्रैंडन मैक्कुलम पर 'आग बबूला' हुए पूर्व दिग्गज खिलाड़ी
इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एशेज में 4-1 से बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद इंग्लैंड के पूर्व दिग्गज ने हेड कोच ब्रैंडन मैक्कुलम पर जमकर अपना गुस्सा निकाला है.
नई दिल्ली: इंग्लैंड क्रिकेट टीम का ऑस्ट्रेलिया दौरा ‘बैजबॉल’ युग की सबसे बड़ी परीक्षा माना जा रहा था. उम्मीद थी कि आक्रामक खेल की यह नई सोच एशेज में इंग्लैंड को ऐतिहासिक सफलता दिलाएगी. हालांकि, नतीजा इसके बिल्कुल उलट रहा. इंग्लैंड को 4-1 से करारी हार का सामना करना पड़ा और इस हार ने टीम की तैयारी, रणनीति और नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए.
इस निराशाजनक प्रदर्शन के बाद इंग्लैंड के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज जेफ्री बॉयकॉट ने कोच ब्रैंडन मैक्कुलम और टीम मैनेजमेंट पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने मैक्कुलम को कोचिंग के पद से हटाने की बात कही है.
बैजबॉल की सच्चाई एशेज में सामने आई
बैजबॉल को आजादी, निडरता और आक्रामक क्रिकेट का प्रतीक माना गया लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यह सोच बार-बार विफल होती दिखी. इंग्लैंड कई अहम मौकों पर मैच को अपने पक्ष में मोड़ सकता था लेकिन गैर-जिम्मेदाराना शॉट चयन और रणनीतिक गलतियों ने टीम को नुकसान पहुंचाया.
ऑस्ट्रेलिया ने अपने कुछ सीनियर खिलाड़ियों की अनुपस्थिति के बावजूद सीरीज पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखा. मिचेल स्टार्क और ट्रैविस हेड जैसे खिलाड़ियों ने निर्णायक भूमिका निभाई, जबकि इंग्लैंड के खिलाड़ी दबाव में बिखरते नजर आए.
जेफ्री बॉयकॉट का तीखा बयान
जेफ्री बॉयकॉट ने अपने लेख में ब्रेंडन मैकुलम, रॉब की और बेन स्टोक्स को लेकर कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया. उनके अनुसार, इन तीनों ने पिछले कुछ सालों में इंग्लैंड क्रिकेट को एक झूठी कहानी बेची.
बॉयकोट का मानना है कि मैकुलम की सोच 'जो मन करे करो' वाली है, जहां खिलाड़ियों को न तो टोका जाता है और न ही खराब प्रदर्शन पर कोई सजा मिलती है. जब न जवाबदेही हो और न ही टीम से बाहर होने का डर, तो खिलाड़ी अपनी गलतियों से क्यों सीखेंगे?
जुआरी जैसी सोच का आरोप
जेफ्री बॉयकॉट ने मैक्कुलम की तुलना ऐसे जुआरी से की जो बार-बार हारने के बावजूद अपनी आदत नहीं बदलता. उनके मुताबिक मैक्कुलम लगातार एक ही आक्रामक रास्ते पर चलते रहे, जबकि परिस्थितियां बदलाव की मांग कर रही थीं. उन्होंने साफ कहा कि अगर कोच और कप्तान हर चीज से संतुष्ट दिखें, तो खिलाड़ियों के लिए खुद को सुधारने की कोई वजह नहीं बचती. यही सोच इंग्लैंड क्रिकेट को पीछे खींच रही है.
आलोचना से बचने की कोशिश
इस दौरे के दौरान इंग्लैंड टीम का रवैया आलोचना के प्रति भी सवालों के घेरे में रहा. कप्तान बेन स्टोक्स ने एक समय पूर्व खिलाड़ियों की सलाह को नजरअंदाज करते हुए उन्हें “पुराने ज़माने का” बता दिया था, हालांकि बाद में उन्होंने माफी मांगी.
मैकुलम भी अपनी तैयारी और रणनीति को लेकर लंबे समय तक आत्मविश्वास से भरे रहे. बाद में उन्होंने माना कि टीम से कुछ गलतियां हुईं और शायद मैचों के बीच समय प्रबंधन सही नहीं था.