नमक हराम निकला बांग्लादेश! जिस भारत की बदौलत टेस्ट टीम का मिला दर्जा, मिली ICC की टूर्नामेंट की मेजबानी उसी के साथ कर डाली गद्दारी

आज बांग्लादेश क्रिकेट जिस मुकाम पर है, वहां तक पहुंचने में भारत और बीसीसीआई की भूमिका बेहद अहम रही है. जून 2000 में आईसीसी ने सर्वसम्मति से बांग्लादेश को टेस्ट स्टेटस दिया, जिसमें भारत की भूमिका निर्णायक रही.

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Anuj

नई दिल्ली: आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2026 को लेकर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड और इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है. बांग्लादेश ने साफ कर दिया है कि वह भारत में वर्ल्ड कप के मुकाबले नहीं खेलेगा. बोर्ड का कहना है कि मौजूदा हालात में खिलाड़ियों की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता. इस फैसले के साथ बांग्लादेश ने वर्ल्ड कप के बहिष्कार के संकेत भी दे दिए हैं.

खेल सलाहकार ने दिया बयान

बांग्लादेश सरकार के खेल सलाहकार आसिफ नजरुल ने खिलाड़ियों से बातचीत के बाद कड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि आईसीसी ने बांग्लादेश के साथ न्याय नहीं किया और इसलिए भारत में खेलने का दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा. उनका यह भी कहना था कि अगर बांग्लादेश वर्ल्ड कप नहीं खेलेगा, तो इसके नतीजे पूरी दुनिया को समझने होंगे. इस बयान के बाद विवाद और बढ़ गया और बीसीबी सीधे तौर पर बीसीसीआई के आमने-सामने आ गया.

आईसीसी का अल्टीमेटम और बीसीबी की जिद

आईसीसी ने बांग्लादेश को साफ शब्दों में बता दिया था कि टी20 वर्ल्ड कप का वेन्यू भारत से बाहर नहीं बदला जाएगा. इसके बावजूद बीसीबी अपने फैसले पर अड़ा हुआ है. खिलाड़ियों और बोर्ड के बीच हुई बैठकों के बाद भी भारत दौरे को लेकर रुख में कोई नरमी नहीं आई. इससे यह साफ हो गया है कि मामला अब सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा.

भारत के एहसान भूला बांग्लादेश?

आज बांग्लादेश क्रिकेट जिस मुकाम पर है, वहां तक पहुंचने में भारत और बीसीसीआई की भूमिका बेहद अहम रही है. साल 1998 में जब बांग्लादेश आईसीसी का फुल मेंबर भी नहीं था, तब तत्कालीन आईसीसी अध्यक्ष और पूर्व बीसीसीआई प्रमुख जगमोहन डालमिया ने आईसीसी नॉकआउट टूर्नामेंट बांग्लादेश में कराने का फैसला लिया. इस आयोजन ने बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहचान दिलाई और उसके भविष्य की नींव रखी.

टेस्ट स्टेटस में भारत की अहम भूमिका

बांग्लादेश 1977 में आईसीसी का एसोसिएट मेंबर बना था, लेकिन उसे टेस्ट दर्जा मिलने में 23 साल लगे. 1999 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान और स्कॉटलैंड पर जीत के बाद उसका दावा मजबूत हुआ. इसके बाद भारत ने बांग्लादेश का पुरजोर समर्थन किया. पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और श्रीलंका भी इस मामले में पक्ष में खड़े थे, जबकि ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड ने विरोध किया था. जून 2000 में आईसीसी ने सर्वसम्मति से बांग्लादेश को टेस्ट स्टेटस दिया, जिसमें भारत की भूमिका निर्णायक रही.

वैश्विक क्रिकेट राजनीति पर असर

नवंबर 2000 में बांग्लादेश ने भारत के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच खेला. बीसीसीआई ने हमेशा बांग्लादेश क्रिकेट का साथ दिया और दोनों देशों के बीच नियमित सीरीज होती रही हैं. ऐसे में अब टी20 वर्ल्ड कप को लेकर बांग्लादेश का सख्त रुख कई सवाल खड़े करता है. यह टकराव सिर्फ क्रिकेट नहीं, बल्कि वैश्विक क्रिकेट राजनीति पर भी असर डाल सकता है.