नई दिल्ली: जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक 20वें एशियन गेम्स का आयोजन किया जा रहा है. इस बार गेम्स के साथ-साथ गेम्स के मेडल भी चर्चा में हैं. इन मेडल्स में जापान की संस्कृति, एडवांस डिजाइन और पर्यावरण संरक्षण को खास जगह दी गई है. अब लोग ये जानना चाह रहे हैं कि आखिर इन मेडल्स को किसने डिजाइन किया है.
एशियन गेम्स 2026 के मेडल का डिजाइन जापानी डिजाइनर डायसुके शिबा ने तैयार किया है. उनका डिजाइन एक प्रतियोगिता के जरिए चुना गया था. मेडल का विचार एथलीट के लंबे सफर को दिखाता है. एक प्लेयर की सफलता के पीछे मेहनत, असफलता, चोट, संघर्ष और लगातार प्रयास के कई छोटे-छोटे हिस्से होते हैं. इन्हीं अलग-अलग हिस्सों के एक साथ जुड़ने को मेडल के डिजाइन में दिखाया गया है. यह सोच एशियन गेम्स के IMAGINE ONE ASIA स्लोगन से भी जुड़ी है, जिसका उद्देश्य खेलों के जरिए एशिया के लोगों को एक साथ जोड़ना है.
इस मेडल की सबसे खास बात इसका रिसाइकल्ड मेडल प्रोजेक्ट है. मेडल में इस्तेमाल होने वाले कुछ मेटल जापान की म्यूनिसिपलिटी द्वारा जमा किए गए छोटी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज से निकाले गए हैं. इस पहल का उद्देश्य सर्कुलर इकोनॉमी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है. यानी पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामान को बेकार फेंकने के बजाय उससे अहम मेटल निकालकर मेडल बनाने में इस्तेमाल किया गया.
मेडल के रिबन में काकीटसुबाटा, यानी जापानी आइरिस फूल का डिजाइन बनाया गया है. यह आइची प्रीफेक्चर का आधिकारिक फूल है. रिबन के घुमावदार डिजाइन में इस फूल की पत्तियों से प्रेरणा ली गई है. आयोजकों के मुताबिक, इसका डिजाइन खिलाड़ियों की मजबूती और फ्लैक्सिबिलिटी को दर्शाता है.
मेडल को रखने के लिए खास बॉक्स भी तैयार किया गया है. यह आइची में उगने वाली हिनोकी यानी जापानी साइप्रेस लकड़ी से बनाया गया है. इस बॉक्स का संबंध जापान की पारंपरिक चाय संस्कृति से भी है, जहां कीमती सामान और चाय से जुड़ी वस्तुओं को लकड़ी के बॉक्स में सुरक्षित रखने की परंपरा रही है.
सभी मेडल गोल आकार के हैं. इनका डायमीटर 80 मिलीमीटर और मोटाई 5 मिलीमीटर है.
गोल्ड मेडल: करीब 265 ग्राम, प्योर सिल्वर पर कम से कम 1 ग्राम सोने की परत
सिल्वर मेडल: करीब 264 ग्राम, प्योर सिल्वर
ब्रॉन्ज मेडल: करीब 222 ग्राम, 95% कॉपर और 5% जिंक