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क्या अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने से घट रही पुरुषों की प्रजनन क्षमता, नई स्टडी से क्या पता चला?

नई स्टडी के अनुसार अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन पुरुषों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है और गर्भधारण में देरी कर सकता है, जबकि महिलाओं में भ्रूण के शुरुआती विकास पर भी असर देखा गया.

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Sagar Bhardwaj

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का चलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसका असर केवल शरीर तक सीमित नहीं है. एक नई रिसर्च में सामने आया है कि ऐसे खाद्य पदार्थ पुरुषों की प्रजनन क्षमता को कम कर सकते हैं और गर्भधारण में अधिक समय लग सकता है. वहीं महिलाओं में भी इसके सेवन का असर भ्रूण के शुरुआती विकास पर देखा गया है. यह अध्ययन दंपतियों के लिए एक अहम संकेत दे रहा है कि खानपान पर ध्यान देना जरूरी है.

अध्ययन कैसे किया गया

यह शोध 2017 से 2021 के बीच किया गया, जिसमें 831 महिलाओं और 651 पुरुषों को शामिल किया गया. प्रतिभागियों से उनके खानपान और गर्भधारण में लगे समय से जुड़ी जानकारी ली गई. शोधकर्ताओं ने गर्भधारण की संभावना और देरी को मापने के साथ-साथ भ्रूण के शुरुआती विकास का भी अध्ययन किया. इसके लिए गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों में अल्ट्रासाउंड के जरिए माप लिए गए.

महिलाओं पर क्या असर दिखा

शोध में पाया गया कि महिलाओं के आहार में करीब 22 प्रतिशत हिस्सा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का था. यह सीधे तौर पर गर्भधारण में देरी से नहीं जुड़ा, लेकिन भ्रूण के आकार और योक सैक के विकास में हल्का अंतर देखा गया. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अंतर छोटा जरूर है, लेकिन लंबे समय में इसका व्यापक असर हो सकता है.

पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर प्रभाव

पुरुषों के आहार में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का हिस्सा लगभग 25 प्रतिशत पाया गया. जिन पुरुषों ने ऐसे खाद्य पदार्थ ज्यादा खाए, उनमें गर्भधारण में अधिक समय लगा और सबफर्टिलिटी का खतरा बढ़ा. हालांकि, इसका असर सीधे तौर पर भ्रूण के शुरुआती विकास पर नहीं देखा गया. विशेषज्ञों का कहना है कि यह शुक्राणुओं की गुणवत्ता पर असर डाल सकता है.

विशेषज्ञों की सलाह

शोध से जुड़े विशेषज्ञों का सुझाव है कि दंपतियों को संतुलित और कम प्रोसेस्ड आहार अपनाना चाहिए. ताजे और प्राकृतिक खाद्य पदार्थ न केवल स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं, बल्कि गर्भधारण की संभावना और स्वस्थ भ्रूण के विकास में भी मददगार साबित होते हैं. सही खानपान भविष्य की पीढ़ी के स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है.