इस दुनिया में हर चीज की एक तय उम्र होती है. खाना, दवाइयां, रिश्ते और अब तौलिया भी. यह बात सुनकर कई लोगों को हैरानी हो सकती है, लेकिन सच्चाई यही है. तौलिया रोज हमारे शरीर के संपर्क में आता है और नमी के कारण उसमें कीटाणु पनपने लगते हैं. समय पर न बदला जाए तो यही तौलिया सेहत के लिए खतरा बन सकता है.
अधिकतर लोग सालों तक एक ही तौलिया इस्तेमाल करते रहते हैं. उन्हें लगता है कि जब तक तौलिया फटा नहीं है, तब तक वह ठीक है. लेकिन डॉक्टर और हाइजीन एक्सपर्ट्स ऐसा नहीं मानते. उनका कहना है कि तौलिये की हालत बाहर से चाहे जैसी दिखे, अंदर जमा बैक्टीरिया आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
हाइजीन विशेषज्ञों के मुताबिक एक सामान्य तौलिये को अधिकतम एक से दो साल तक ही इस्तेमाल करना चाहिए. लगातार गीला होने और ठीक से न सूखने की वजह से उसमें बैक्टीरिया, फंगस और डेड स्किन जमा हो जाती है. समय के साथ यह साफ दिखना बंद हो जाता है, लेकिन अंदरूनी गंदगी बनी रहती है, जो आंखों से नजर नहीं आती.
एक्सपायर तौलिये का इस्तेमाल करने से त्वचा पर खुजली, रैशेज और फंगल इंफेक्शन हो सकता है. खासकर चेहरे और प्राइवेट हिस्सों पर इसका असर जल्दी दिखता है. कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए यह और भी खतरनाक साबित हो सकता है. कई बार लोग इलाज कराते रहते हैं, लेकिन असली वजह तौलिया ही होता है.
अगर तौलिये से अजीब सी बदबू आने लगे, धुलने के बाद भी वह सख्त महसूस हो या उसकी रंगत फीकी पड़ गई हो, तो समझ लें कि वह एक्सपायर हो चुका है. इसके अलावा अगर तौलिया जल्दी सूखता नहीं है, तो यह भी बैक्टीरिया पनपने का साफ संकेत है.
तौलिये को हर इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह सुखाना बेहद जरूरी है. गीले तौलिये को बाथरूम में लटकाकर न छोड़ें. हफ्ते में कम से कम दो बार तौलिया धोना चाहिए. इसके अलावा हर व्यक्ति का अलग तौलिया होना चाहिए, ताकि संक्रमण फैलने का खतरा न रहे.
समय पर तौलिया बदलना एक छोटी सी आदत लग सकती है, लेकिन इसका असर आपकी सेहत पर बड़ा होता है. जैसे हम पुराने टूथब्रश को बदल देते हैं, वैसे ही तौलिये को भी समय-समय पर बदलना जरूरी है. थोड़ी सी सतर्कता आपको त्वचा की कई समस्याओं से बचा सकती है.
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