18–20 घंटे का उपवास करती हैं सोनाली बेंद्रे, कैंसर के बाद 'ऑटोफैगी' पर कही बड़ी बात; डॉक्टरों ने दी जरूरी सलाह
अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे ने कैंसर के बाद 18–20 घंटे उपवास और ऑटोफैगी का अनुभव साझा किया. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह इलाज नहीं, बल्कि सीमित परिस्थितियों में सहायक जीवनशैली हो सकती है.
अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे ने हाल ही में अपनी स्वास्थ्य यात्रा और खानपान की आदतों पर खुलकर बात की. साल 2018 में स्टेज-4 मेटास्टेटिक कैंसर का सामना करने वाली सोनाली ने बताया कि अब वह 18 से 20 घंटे का इंटरमिटेंट फास्टिंग (रुक-रुक कर उपवास) करती हैं. उन्होंने कहा कि वह आमतौर पर दिन में डेढ़ या दो बार ही भोजन करती हैं और अब बार-बार खाने की बजाय संतुलित एवं सजग भोजन (Mindful Eating) पर ध्यान देती हैं. उन्होंने बताया कि ऑटोफैगी (Autophagy) से जुड़े शोध ने उनकी स्वास्थ्य यात्रा को समझने में मदद की.
क्या है ऑटोफैगी, जिस पर हो रही चर्चा
सोनाली के बयान के बाद ऑटोफैगी को लेकर चर्चा तेज हो गई है. पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, ऑटोफैगी शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें पुरानी या क्षतिग्रस्त कोशिकाओं के हिस्सों को तोड़कर उनका पुनः उपयोग किया जाता है. यह प्रक्रिया कोशिकाओं को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है. विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक भोजन करने से यह प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है, जबकि संतुलित खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि और सीमित समय में भोजन करने जैसी आदतें कुछ लोगों में इसे बेहतर ढंग से काम करने में मदद कर सकती हैं.
डॉक्टर बोले- कैंसर का इलाज नहीं है उपवास
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि ऑटोफैगी या इंटरमिटेंट फास्टिंग को कैंसर के उपचार का विकल्प नहीं माना जा सकता. मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. वीणू अग्रवाल के अनुसार, ऑटोफैगी अभी भी वैज्ञानिक अनुसंधान का विषय है और कैंसर से उबरने का आधार प्रमाण-आधारित चिकित्सा ही है. डॉक्टरों ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की रिकवरी को केवल उपवास या ऑटोफैगी से जोड़ना सही नहीं होगा.
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हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं लंबा उपवास
विशेषज्ञों का कहना है कि 18–20 घंटे का उपवास सभी लोगों के लिए सुरक्षित या उपयुक्त नहीं है. विशेष रूप से मधुमेह के मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, गंभीर बीमारी से उबर रहे लोगों और नियमित दवाइयां लेने वालों को बिना चिकित्सकीय सलाह के इस तरह का उपवास नहीं करना चाहिए. लंबे समय तक भोजन न करने से शरीर में प्रोटीन, विटामिन और आवश्यक पोषक तत्वों की कमी का खतरा भी बढ़ सकता है.
वजन घटाने का एकमात्र उपाय नहीं
इंटरमिटेंट फास्टिंग की लोकप्रियता बढ़ी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल लंबे समय तक भूखे रहने से वजन कम नहीं होता. यदि भोजन की निर्धारित अवधि में जरूरत से अधिक कैलोरी ली जाए तो वजन बढ़ भी सकता है. वहीं, संतुलित आहार और नियंत्रित मात्रा में भोजन करने वाला व्यक्ति सामान्य दिनचर्या अपनाकर भी स्वस्थ वजन बनाए रख सकता है.
संतुलित जीवनशैली अपनाने की सलाह
डॉक्टरों का सुझाव है कि यदि कोई व्यक्ति इंटरमिटेंट फास्टिंग अपनाना चाहता है तो शुरुआत हल्के बदलावों से करनी चाहिए. रात के भोजन और सुबह के नाश्ते के बीच 12–14 घंटे का अंतर, देर रात स्नैकिंग से बचना, पर्याप्त प्रोटीन, हरी सब्जियां, फाइबर युक्त भोजन और नियमित व्यायाम अधिक टिकाऊ और सुरक्षित विकल्प माने जाते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, किसी सेलिब्रिटी की जीवनशैली को बिना व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति को समझे अपनाने के बजाय डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहता है.